सीकर

राजस्थान के इस गांव में होली के दूसरे दिन नहीं बल्कि आज मनाई गई धुलंडी, इसके पीछे ये हैं कारण

एक तरफ जहां होली के दूसरे दिन धुलंडी पर देशभर के लोग रंगों की उमंग और मस्ती में डूबे रहते हैं। वहीं राजस्थान का एक ऐसा गांव भी जहां धुलंडी होली के दूसरे दिन नहीं बल्कि शीतलाष्टमी पर मनाई जाती है।
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Mar 28, 2019
एक तरफ जहां होली के दूसरे दिन धुलंडी पर देशभर के लोग रंगों की उमंग और मस्ती में डूबे रहते हैं। वहीं राजस्थान का एक ऐसा गांव भी जहां धुलंडी होली के दूसरे दिन नहीं बल्कि शीतलाष्टमी पर मनाई जाती है।
राजस्थान के इस गांव में होली के दूसरे दिन नहीं बल्कि आज मनाई गई धुलंडी, इसके पीछे ये हैं कारण

सीकर।
एक तरफ जहां होली के दूसरे दिन धुलंडी पर देशभर के लोग रंगों की उमंग और मस्ती में डूबे रहते हैं। वहीं राजस्थान का एक ऐसा गांव भी जहां धुलंडी होली के दूसरे दिन नहीं बल्कि शीतलाष्टमी पर मनाई जाती है। जी हां हम बात कर रहे है राजस्थान के सीकर जिले में स्थित गणेश्वर गांव की। यहां शीतलाष्टमी पर्व पर लोग धुलंडी मनाते है। गुरुवार को गांव में शीतला अष्टमी पर्व पर ग्रामीणों ने धुलंडी खेली। सुबह सात बजे सें रंगों का त्योहार शुरु हो गया था। गल्ली मोहल्लो में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक होली खेलते नजर आए। इस दौरान महिलाएं भी रंगो के उमगों में मस्ती के साथ होली खेलती नजर आई। ग्रामीणों ने अपनो के संग गुलाल लगाकर धमाल के गीत गाए। लोक संगीत व बाजो के साथ ग्रामीण नाचते गाते होली खेलते हुए ग्राम देवता के मन्दिर में पहुंचे। जहां पर ग्राम देवता बाबा रायसल महाराज के मन्दिर में भी होली खेली गई। ग्राम देवता के भी रंग लगाया गया।

400 वर्षों से चलती आ रही है परंमरा
शीतलाष्टमी के दिन धुलंडी की यह परम्परा 400 वर्षों से चलती आ रही है। गांव में होली के दूसरे दिन धुलंडी नही खेली जाती। होली के दूसरे दिन यहां डूडू मेला भरता है। इस दिन ग्राम देवता बाबा रायसल जी का राजतिलक हुआ था। जब से ही आज भी यह मान्यता बरकरार है। धूलंड़ी के दिन सभी निजी विधालयो का अवकाश रहा

Updated on:
28 Mar 2019 05:53 pm
Published on:
28 Mar 2019 05:53 pm