निजी क्षेत्र की एक बड़ी डेयरी की ओर से जिले में एक सप्ताह पहले तक छाछ 1800 लीटर व दही के कप 500 बेचे जा रहे थे
सीकर. शहर में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे ही दही और छाछ की बिक्री और मांग बढ़ती जा रही है। दुकानदार भी अपनी मनमानी करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। दुकानदार छाछ और दही के पैकेट पर प्रिन्ट रेट से तीन से पांच रुपए तक ज्यादा वसूल रहे हैं। जब दुकानदार से प्रिन्ट से अधिक रुपए वसूले जाने पर पूछा जाता है तो जवाब मिलता है लेना है तो लो, वरना आगे देख लो। ऐसा नहीं कि शहर में यह एक दुकान का मामला है। शहर की कई दुकानों पर धड़ल्ले से तय मूल्य से अधिक रुपए वसूले जा रहे हैं। जयपुर रोड, शांतिनगर औद्योगिक क्षेत्र में यह मामला ज्यादा देखने को मिल रहा है। जबकि जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।
दही, छाछ बिक्री बढ़ी
भीषण गर्मी के कारण पेय पदार्थों की मांग बढ़ गई है। छाछ, दही का सेवन प्रतिदिन खान-पान में शामिल हो गया है। सबसे अधिक खपत छाछ व दही की बढ़ी है। खपत का आंकड़ा इतना ज्यादा बढ़ गया है कि कई डेयरी बूथ पर दोपहर तक स्टॉक खत्म हो जाता है। डेयरी क्षेत्र से जुडे लोगों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में गर्मी के तीखे तेवरों के छाछ व दही की खपत दो गुना से ज्यादा बढ़ी है। कमोबेश यही स्थिति आइसक्रीम और गन्ने के जूस की है।
आकड़ों में खपत
जिले में प्रतिदिन लाखों की छाछ व दही पी जाते हैं। यह हम नहीं निजी व सहकारी क्षेत्र की विभिन्न डेयरियों से लिए गए आंकड़े बता रहे हैं। आंकड़ो के अनुसार यह खपत इस समय प्रतिदिन 10 हजार लीटर से अधिक है। निजी क्षेत्र की एक बड़ी डेयरी की ओर से जिले में एक सप्ताह पहले तक छाछ 1800 लीटर व दही के कप 500 बेचे जा रहे थे। जबकि श्रीखंड की खपत 1500 कप तक थी।
महज एक सप्ताह में यह खपत प्रतिदिन 3500 लीटर व दही के कप करीब एक हजार कप से अधिक हो गई है। सबसे अधिक खपत छाछ व दही की बढ़ी है। खपत का आंकड़ा इतना ज्यादा बढ़ गया है कि कई डेयरी बूथ पर दोपहर तक स्टॉक खत्म हो जाता है। डेयरी क्षेत्र से जुडे लोगों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में गर्मी के तीखे तेवरों के छाछ व दही की खपत दो गुना से ज्यादा बढ़ी है। कमोबेश यही स्थिति आइसक्रीम और गन्ने के जूस की है।