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चुभती हरियाली : 192 हैक्टेयर में फैले देवीपुरा बीड़ में 76 हजार पेड़-पौधों में से 65 हजार विलायती बबूल

यादवेंद्रसिंह राठौड़ सीकर. इसे जिम्मेदारों की अनदेखी कहें या लापरवाही, पर्यावरण व जमीन की हरियाली को लीलने वाला विलायती बबूल का दायरा बढ़ता जा रहा है। इसका नमूना जिला मुख्यालय पर देवीपुरा बीड़ में फैला इसका जाल है। सीकर शहर में सांवली रोड व चंदपुरा रोड पर करीब 192 हैक्टेयर में देवीपुरा बीड़ है। वन […]

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सीकर

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Yadvendra Singh Rathore

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Yadvendra Singh Rathore

Apr 11, 2026

हमारी धरती पर नासूर बने प्रोसेपिस जूलीफ्लोरा : जैव विविधता व जमीन की नमी को लील रहे घातक विलायती बबूल

यादवेंद्रसिंह राठौड़

सीकर. इसे जिम्मेदारों की अनदेखी कहें या लापरवाही, पर्यावरण व जमीन की हरियाली को लीलने वाला विलायती बबूल का दायरा बढ़ता जा रहा है। इसका नमूना जिला मुख्यालय पर देवीपुरा बीड़ में फैला इसका जाल है। सीकर शहर में सांवली रोड व चंदपुरा रोड पर करीब 192 हैक्टेयर में देवीपुरा बीड़ है। वन विभाग के कार्यालय से लेकर जिला खेल स्टेडियम और चंदपुरा रोड से लेकर देव गैस एजेंसी तक देवीपुरा बीड़ फैला हुआ है। विलायती बबूल राज्य में पशुधन, कृषि, वेटलैण्ड्स, पशु-पक्षियों, वन्यजीवों और जनजीवन के लिए काफी हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार एक हेक्टेयर में करीब 400 से 500 तक पेड़-पौधे लगते हैं। ऐसे में देवीपुरा बीड़ के करीब 192 हैक्टेयर बीड़ में अनुमानित 76 हजार पेड़-पौधे लगे हुए हैं। इनमें से करीब 65 हजार पेड़ विलायती बबूल (प्रोसोपिसजूलीफ्लोरा) के हैं। जूलीफ्लोरा जैव विविधता के लिए खतरा है और इसके बीजारोपण पर प्रतिबंध है। ड्रोन से ली गई इस फोटो में जो बड़े'गुच्छे' दिख रहे हैं, वे ज्यादातर विलायती बबूल के ही हैं।

जैव विविधता का दुश्मन है विलायती बबूल-

जूलीफ्लोराविषबेल के कारण शाकाहारी वन्यजीवों के लिए घास नहीं उग रही और वन्यजीव पलायन को मजूबर हैं। विलायती बबूल बहुत तेजी से फैलता है और उपर से घनी छतरी (Canopy) के आकार का होता है। भूजल को तेजी से सोखकर मिट्टी को बंजर बना रही है। यह पौधा अपनी जड़ों और पत्तियों से ऐसा रसायन उत्सर्जित करता है जिससे कि इसके नीचे अन्य कोई वनस्पति या पेड़-पौधे नहीं पनपते हैं। इसके तीखे कांटे मवेशियों व मनुष्यों के लिए हानिकारक है। यह स्थानीय वन्य जीवों के लिए भोजन-पानी की कमी का कारण बन रहा है। जूलीफ्लोराविषबेल के कारण शाकाहारी वन्यजीवों के लिए घास नहीं उग रही हैं।

इनका कहना है -

प्रोसोपिसजूलीफ्लोरापेड़ पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा है। सीकर के देवीपुरा बीड़ व नानी बीड़ में विलायती बबूल बहुतायत में है। वन मंत्री संजय शर्मा ने भी प्रदेश से विलायती बबूल को जड़ से खत्म करने (उखाड़ने) की कार्ययोजना पर काम करने की बात कही है। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से निर्देश मिलने पर हम तुरंत इस पर अमल करेंगे।

दीपक कुमार, डीएफओ, सीकर