
सर्दी की दस्तक के साथ झोलाछाप चिकित्सकों ने जमकर चांदी लूटनी शुरू कर दी है। हायर लेवल की एंटीबायोटिक दवाएं देने के कारण मरीजों में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस की शिकायत आ रही है। इसकी बानगी है कि झोलाछापों का मकड़जाल तो प्रदेश की हर ग्राम पंचायत एवं ढाणियों तक फैल चुका है। आश्चर्य की बात है कि इसके बावजूद गांव व ढाणियों में स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों की ओर से हर माह अपने क्षेत्र में एक भी झोलाछाप सक्रिय नहीं होने की रिपोर्ट दी जाती है। इसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की थीम प्रिवेटिंग एन्टी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस टुगेदर के तहत जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों पर एंटीबायोटिक दवाओं के सही उपयोग एवं इसके बारे में मरीजों एवं उनके परिजनों को जागरुक किया जाएगा।
टीबी के मरीजों को ज्यादा परेशानी
समस्या से ज्यादा परेशानी टीबी के रोगियों को हो रही है। गांवों में झोलाछाप चिकित्सक मरीजों को हाई लेवल की एंटीबायोटिक्स एवं दवाएं देते हैं। टीबी के मरीज को खांसी होने पर झोलाछाप उसे हायर लेवल एंटीबायोटिक्स के प्रयोग से पहले दबा देते हैं, जबकि उस एंटीबायोटिक्स का उपयोग बीमारी के दूसरे चरण में होता, लेकिन ये पहले ही करके टीबी के रोग को बढ़ा देते हैं। इस तरह से एमडीआर रोगियों की संख्या भी बढ़ी है।
पोस्टर का विमोचन
राजकीय कल्याण चिकित्सालय स्थित सेंट्रल लैब में विश्व एन्टी माइक्रोबियल रेजिस्टेन्स जागरूकता सप्ताह के तहत अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेन्द्र कुमार ने पोस्टर विमोचन किया। अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. जगदीश सीगड़ ने बताया कि सप्ताह के तहत सीएमई का आयोजन किया जाएगा। हॉस्पिटल स्टाफ का ऑरिएन्टेशन, इन्फेक्शन कंट्रोल के लिए जरूरी प्रशिक्षण, व आइइसी गतिविधियां होंगी। विमोचन के दौरान डॉ. एम सागर, डॉ. देवेंद्र दाधीच, डॉ दर्शन भार्गव, डॉ. सुनिता महला, डॉ. गणेशीलाल व डॉ. इंद्रा वर्मा मौजूद रहे।