सीकर

कला की साधना से आत्मा को मिलती है ऊर्जा

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Aug 11, 2018
faiyaz wasifuddin dagar interview in Jhunjhunu
faiyaz wasifuddin dagar interview in Jhunjhunu

झुंझुनूं. संगीत या कला की साधना करने से साधक की आत्मा को ऊर्जा मिलती है। यह कहना है ध्रूपद गायन शैली के प्रख्यात गायक पद्मश्री उस्ताद फैयाज वासिफुद्दीन डागर का। वासिफुद्दीन शुक्रवार को राजस्थान पत्रिका से खास बातचीत कर रहे थे।


उन्होंने कहा कि कला एवं संगीत मानव के लिए प्रकृति का उपहार है। मानव शरीर में कला एवं संगीत का कही न कही समावेश होता है। इन से ही जीवन में पूर्णता का संचार होता है। डागर ने कहा कि देश में कला संगीत एवं संस्कृति का बड़ा बेजोड़ संगम रहा है। मगर कुछ समय के लिए इस दिशा में काम नहीं हुआ।

पिछले कुछ दशकों से कला साधना की तरफ लोगों का ध्यान गया है। स्पीक मैके भी कला सरंक्षण की दिशा में अच्छा काम कर रहा है। स्पीक मैके के माध्यम से ही युवा पीढ़ी कलाकारों से कला की बारीकियां सीख रही है ओर इसी का परिणाम है कि आज के दौर में युवाओं में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। डागर ने माना की देश में शास्त्रीय संगीत से छेडख़ानी कर इस को विद्रूपित किया जा रहा है।

कम्प्युटर तथा मोबाइल पर इस प्रकार के एप्स उपलब्ध हैं। जिन से संगीत की मूल शैली प्रभावित होती है। उन्होने देश के नये कलाकारों का आह्वान करते हुए इस दिशा में कार्य करने की अपील की। कला को शिक्षा से जोडऩे के एक सवाल के जवाब में डागर ने कहा कि देश का मंत्रालय संगीत को खास कर प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षा से जोडऩे की दिशा में काम कर रहा है। कुछ कलाकार भी इस दिशा में काम कर रहे हैं उम्मीद है कुछ अच्छे परिणाम मिलेगे।


जिस से बच्चों में संगीत के प्रति रूचि तो बढेगी ही इससे समाज में बड़े पैमाने पर परिवर्तन देखने को मिलेगा। उन्होने माना कि सरकारों के बजट में कला के लिए नाम मात्र का बजट होता है। बजट के अभाव में कला व कलाकारों को संघर्ष करना पड़ता है। इससे कला की साधना में परेशानी होती है।

Published on:
11 Aug 2018 04:17 pm