Real Life Motivational Story: सीकर में गांव के किसान पुत्र पंकज कुमार शर्मा ने RPSC कॉलेज व्याख्याता परीक्षा में बॉटनी विषय में प्रदेश में 5वीं रैंक हासिल कर कीर्तिमान रचा है। इससे पहले दो बार वेटिंग लिस्ट में रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी।
Assistant Professor Pankaj Kumar Sharma: सीकर के लक्ष्मणगढ़ उपखंड के कंटेवा गांव के एक किसान के बेटे ने गांव और परिवार का नाम रोशन किया है। कंटेवा निवासी 35 वर्षीय पंकज कुमार शर्मा ने आरपीएससी की ओर से गत 16 फरवरी को घोषित कॉलेज व्याख्याता (असिस्टेंट प्रोफेसर) परीक्षा परिणाम में बॉटनी विषय में प्रदेश में पांचवीं रैंक हासिल की है।
इससे पहले वे दो बार वेटिंग लिस्ट में रह चुके थे। यही नहीं, पंकज से इसी साल ही मध्यप्रदेश सरकार की ओर से आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर (बॉटनी) भर्ती परीक्षा में भी 6वीं रैंक प्राप्त की है। पंकज वर्तमान में मध्यप्रदेश के शुजालपुर गवर्नमेंट कॉलेज, शाजापुर (म.प्र.) में कार्यरत हैं।
पंकज की सफलता पर कंटेवा सहित पूरे लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में हर्ष का वातावरण है। पंकज ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सफलता किसी एक दिन का परिणाम नहीं, बल्कि सतत अनुशासित तैयारी का प्रतिफल है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और आत्मविश्वास अडिग, तो परिस्थितियां भी रास्ता दे देती हैं।
पंकज का संघर्ष काफी लंबा है। 2016 और 2020 दोनों बार आरपीएससी की भर्ती में नाम वेटिंग सूची तक पहुंचा, पर अंतिम चयन से चूक गए। लेकिन पंकज ने हार नहीं मानी। घरेलू आर्थिक स्थिति का सम्बल प्रदान करने के उद्देश्य से करीब 10 वर्षों तक विभिन्न निजी शिक्षण संस्थानों में अध्यापन करते हुए उन्होंने अपने विषय की जड़ों को और मजबूत किया। 2012 में एमएससी. (बॉटनी) उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने सेट, नेट, नेट जेआरएफ और एसआरएफ जैसी राष्ट्रीय पात्रताएं भी अर्जित कीं। वर्तमान में वे पीएचडी के अंतिम चरण में हैं।
पंकज के पिता ताराचंद शर्मा साधारण कृषक व मां संतरा देवी गृहिणी हैं। किसान पिता की मेहनत और सादगी ने उन्हें जमीन से जुड़े रहना सिखाया। उनकी पत्नी रेखा शर्मा ने संघर्ष के दिनों में अटूट सहयोग दिया। पंकज के बड़े भाई वीरेंद्र कुमार शर्मा उपखंड के बलारां गांव की महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में जीव विज्ञान के व्याख्याता व दूसरे भाई मुकेश कुमार शर्मा उपखंड के ही बीदासर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में भौतिक शास्त्र के व्याख्याता पद पर कार्यरत हैं।
पंकज व उनका परिवार कई सालों से पत्रिका के नियमित पाठक है। पंकज ने बताया कि पिता से बचपन से अखबार पढऩे की आदत से संघर्ष के दिनों में मजबूती मिली। पंकज ने बताया कि पत्रिका से सामान्य ज्ञान व राजस्थान की संस्कृति के बारे में पर्याप्त जानकारी मिली वहीं पत्रिका में युवाओं के लिए प्रकाशित खबरों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। पंकज मध्यप्रदेश में रहते हुए भी पत्रिका के ऑनलाइन संस्करण से दिन की शुरूआत करते हैं।