
योगेश पारीक, फतेहपुर.
कोतवाली तिराहे के पास स्थित पेट्रोल पंप की बेशकीमती जमीन को अफसरों ने फर्जी तरीके से पेट्रोल पंप मालिक के नाम कर दिया। जिस जमीन के नामांतरण के अधिकार संभागीय आयुक्त के पास थे उसे नायब तहसीलदार ने गैर खातेदारी से खातेदारी में दर्ज कर दी। इस पूरी प्रक्रिया को एक ही दिन में पूरा कर दिया। आंतरिक लेखा दल की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इसका खुलासा होने के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई थी लेकिन अफसर इस मामले की फाइल दबाए बैठे हैं। वन विभाग और प्रशासन की मिलीभगत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस नामांतरण को गलत माना गया है, उसमें निर्माण जारी रहा। जानकारी के मुताबिक 1972 में तत्कालीन जिला कलक्टर ने प्रचलित नियमों के तहत यह जमीन पेट्रोल पंप, धर्मशाला, प्याउ, वर्कशॉप के लिए दी थी। इसके बाद वर्ष 1978 में जिला कलक्टर ने आदेश की समीक्षा करते हुए सत्यनारायण अग्रवाल को निर्देश जारी कर प्रीमियम एवं रेंट वसूली के आदेश जारी किए। प्रीमियम व रेंट जमा नहीं कराने पर नियमानुसार विरूद्ध बेदखली की कार्रवाई करने के आदेश पारित किए थे।
सरकार को राजस्व हानि
वर्ष 1978 में जिला कलक्टर के आदेश के बाद आंवटी द्वारा 36,598 रुपए जमा करवा जा चुके हैं। ऑडिट रिपोर्ट में बताया कि कि जिला कलक्टर एवं राज्य सरकार ने न तो उक्त आवंटन/नियमन किया गया है और न ही आंवटी से वाणिज्यिक/औधोगिक अथवा सार्वजनिक प्रयोजनार्थ भूमि उपयोग के लीज रेंट/प्रीमीयम तथा अन्य प्रभारों का निर्धारण किया जा रहा है, इससे सरकार को राजस्व हानि हुई है।
हाईकोर्ट के आदेशों की हो रही है अवहेलना
रिपोर्ट के अनुसार नगरीय क्षेत्रों के रूपान्तरण नियम 1999 अपास्त हो चुके हैं। नवीन नियम प्रचलित है। ऐसे में आवंटी द्वारा उपयोग में ली गई भूमि को सिवायचक दर्ज कर स्थानीय निकाय को वाणिज्यिक, औधोगिक एवं संस्थागत प्रयोजनार्थ नियमन करने की कार्यवाही की जाती तो राज्य सरकार को लाखों की राजस्व आय हो सकती थी।
नायब तहसीलदार ने ही कर दिए साइन
भूमि नगर पालिका क्षेत्र में होने के कारण गैर खातेदारी से खातेदारी दिए जाने के अधिकार उक्त समय संभागीय आयुक्त के पास थे। लेकिन नायब तहसीलदार ने हस्ताक्षर कर राज्य सरकार के नियमों की स्पष्ट अवहेलना की है। आडिट रिपोर्ट के अनुसार पटवारी हल्का गारिण्डा, तत्कालीन भू अभिलेख निरीक्षण व नायब तहसीलदार दोषी पाएं गए। रिपोर्ट में इनके खिलाफ कार्यवाही के लिए जिला कलक्टर को ध्यान में लाकर कार्यवाही राजस्व मण्डल को अवगत करवाने की बात कही गई है।
मिलीभगत कर ऐसे कर दी जमीन नाम
राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने मिलीभगत कर बेशकीमती जमीन को गैर खातेदारी से खातेदारी कर दी। भले ही आमजन को जमीन का नामान्तरण करवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ते हो, उक्त पूरी प्रकिया एक ही दिन में पूर्ण कर दी गई। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार सत्यनारायण पुत्र घनश्यामदास महाजन की नोटेरी वसीयत व मृत्यु प्रमाण पत्र को आधारमानकर उक्त भूमि की खातेदारी गोपाल पुत्र दीनदयाल केजड़ीवाल के नाम 26.6.15 नामान्तरण दर्ज कर उसी दिन जांच भू अभिलेख निरीक्षक श्रवण कु मार एवं स्वीकृत नायब तहसीलदार सुरेन्द्र सिंह मील को उसी दिन किया गया। वसीयत नोटेरी व शपथ पत्र के आधार पर किया गया जो कि पूर्णतया नियमानुसार सही नहीं है। नियमानुसार वसीयत नोटेरी की राजस्व अधिकारी / तहसीलदार द्वारा समुचित सुनवाई के उपरांत आदेश जारी किए जाने पर ही नामान्तरण की कार्यवाही की जानी थी लेकिन पटवारी हल्का ने सीधे ही नामान्तरण दर्ज कर दिया। एक ही दिन में नामान्तरण की सम्पूर्ण कार्रवाई को अंजाम दे दिया गया। इसके लिए ऑडिट टीम ने संबंधित पटवारी श्रवण कुमार, भू अभिलेख निरीक्षक श्रवण कुमार एवं स्वीृकत अधिकारी नायब तहसीलदार सुरेन्द्र सिंह मील को दोषी माना है।
इनका कहना है
गैर खातेदारी से खातेदारी में परिवर्तन करने का यह मामला ऑडिट में सामने आया था। तहसीलदार के द्वारा रेफरेन्स बनाकर जिला कलक्टर को भिजवाया जा चुका है। पेट्रोल पंप मालिक के नाम जमीन कैसे दर्ज हुई, इसकी जांच की जा रही है। -रेणु मीणा,उपखंड अधिकारी, फतेहपुर