
सीकर. गांव के एक युवक के साथ फाइनेंस के नाम पर ठगी करने का मामला सामने आया है। जिसमें फाइनेंस कंपनी के प्रतिनिधियों ने मिलकर युवक को डेढ़ लाख रुपए के फाइनेंस के बदले केवल ९० हजार रुपए दिए और बाद में किश्त का हवाला देकर उसका चौपहिया वाहन भी जबरन उठा ले गए।
जानकारी के अनुसार भोजासर छोटा निवासी महेंद्र कुमार ने सामान सप्लाई करने का रोजगार शुरू करने के लिए एक चौपहिया वाहना खरीदा था। इसके फाइनेंस के लिए उसने किसी युवक से सपंर्क किया और जिसने डेढ़ लाख रुपए कंपनी से फाइनेंस कराने का झांसा देकर गाड़ी के कागजात रख लिए। पीडि़त महेंद्र का आरोप है कि फाइनेंस के तौर पर कपंनी ने उसके खाते में केवल ९० हजार रुपए डलवाए और दस हजार रुपए एडवांस किश्त व फाइल चार्ज के काट लिए। जबकि बाकी ५० हजार रुपए के बदले फाइनेंस कंपनी के प्रतिनिधि उसे झांसा देते रहे। इधर, हर महीने किश्त के तौर पर फाइनेंस कंपनी को उसने ४३ हजार रुपए चुका भी दिए। फिर एक दिन कंपनी के तीन प्रतिनिधि उसके घर रिकवरी करने पहुंच गए और यहां रुपए लेने के बाद उसकी रसीद भी नहीं दी। इसके कुछ दिन बाद जब वह सामान की सप्लाई करने आकवा गांव गया हुआ था तो दो जने आए और उसकी गाड़ी उठा ले गए। जबकि गाड़ी में ३९००० हजार रुपए नकद और सामान था। वह भी नहीं लौटाया। अब फाइनेंस वाले नाजायज रुपए मांग रहे हैं और उसकी गाड़ी को बेचान करने की धमकी दे रहे हैं।
आरोपी को खुद ने खोजा
पुलिस में परिवाद देने के बाद पीडि़त युवक ने एक आरोपी को बीकानेर में खोज निकाला। उस दौरान मामले की जांच कल्याण सर्किल चौकी इंचार्ज संजय पूनिया के पास थी। मामले में गिरफ्तारी होती। इससे पहले ही पूनिया का तबादला हो गया। इसके बाद पीडि़त युवक पुलिस अधीक्षक से मिला तो उन्होंने जांच चौकी प्रभारी कैलाश मीणा को सौंप दी। युवक का आरोप है कि जांच अधिकारी मामले में एफआर लगा रहे हैं और एफआर पर उसके जबरन हस्ताक्षर करवाना चाहते हैं। इसकी शिकायत करने जब वह सोमवार को पुलिस अधीक्षक के पास गया तो वहां दो कांस्टेबल भिजवा कर उस पर हस्ताक्षर करने का दबाव भी बनाया गया।
-प्रकरण जांच में झूठा पाया गया है। इसलिए मामले में एफआर लगा दी गई है। फाइनेंस कंपनी से मिले बाकी ५० हजार रुपए महेंद्र ने किसी रामजीलाल व्यक्ति को दे दिए थे।
कैलाश मीणा, कल्याण सर्किल चौकी इंचार्ज