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जनार्दन शर्मा
खंडेला. जरूरी नहीं कि इंसान के पास पैसा हो तो ही वो किसी कि मदद कर सकता है। वह दूसरे माध्यम से भी मदद कर सकता है। लेकिन हम जिनकी बात कर रहे हैं वो ग्राम पंचायत सुजाना के गांव समर्थपुरा के 54 वर्षीय छीतरमल तेतरवाल हैं। छीतरमल दिव्यांग हैं, लेकिन दूसरों की मदद की आस रखने वाले छीतरमाल ने अपने दिव्यांग को आड़े नहीं आने दिया।
छीतरमल के दाहिने हाथ की अंगुली व अंगूठा कटा हुआ है। इसके बाद भी उनके जज्बे में कोई कमी नहीं है। हुआ यूं कि गांव के विद्यालय को भामाशाह कुछ न कुछ मदद कर रहे थे। छीतरमल भी अपनी ओर से इस विद्यालय के लिए कुछ करना चाहते थे। जब उन्हें पता चला कि बच्चों के लिए बिजली नहीं है और बिजली 180 मीटर खाई खोदने पर आ सकती है। बस छीतरमल से सोचा कि वह बच्चों तक बिजली जरूर पहुंचाएगा। उन्होंने बिना किसी मजदूरी के खाई खोदनी शुरू कर दी।
चार दिन की कड़ी मेहनत के बाद उसने 180 मीटर लम्बी तथा 2 फीट गहरी खाई खोद दी। जब लोगों ने यह देखा तो सभी ने छीतमल के कार्य की सराहना की। प्रधानाचार्य मोहनलाल सामोता ने कहा कि दिव्यांग होने के बाद कुछ करने का जज्बा विद्यार्थियों को जरूर प्रेरित करेगा। छीतरमल ने यह कार्य बिना मजदूरी लिए किया है।
थ्रेशर में कटा था हाथ
करीब पन्द्रह वर्ष पहले छीतरमल थे्रशर से अनाज निकलवा रहा था, उस समय उसका हाथ उसमें आ जाने से दाहिने हाथ की चारों अंगुलियां तथा अंगूठा कट गया था। खेती के काम के साथ-साथ छीतरमल मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करता है। दो लड़के तथा दो लडकियां है। इनमें से बड़ी लड़की की शादी कर दी। छोटी बेटी सातवीं में तथा दोनों बेटे 11 वीं कक्षा में पढ़ते हैं।