
सीकर.
जिले में महिला सुरक्षा एवं सलाहकार केंद्र पिछले दो साल से बंद पड़ा है। महिला अधिकारिता विभाग जिले में अपराजिता मॉडल भी शुरू नहीं करा पा रहा। इससे थानों में महिला अत्याचार से अधिकांश मामलों में काउंसलिंग नहीं हो पा रही है।
इस कारण लगातार मामलों की संख्या बढ़ रही है। महिला एवं बालिकाओं के अधिकारों, संबंधित योजनाओं और कानूनी प्रावधान के प्रति जागरूक करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रदेश के १५ जिलों में महिला शक्ति केंद्र शुरू करने के आदेश दिए। इस सूची में सीकर जिले का भी नाम शाामिल था। लेकिन जिले को छोडक़र १६ जिलों में केंद्र शुरू हो गए। यहां संचालन के नियमों में एनजीओ के उलझने के कारण सेंटर शुरू नहीं हो पा रहा है।
योजना शुरू करने का मकदस
केंद्र खोलकर महिलाओं से जुड़ी योजनाओं का सूचना बैंक के रूप में प्रचार करना। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, वन स्टाप सेंटर, महिला हैल्पलाइन, महिला पुलिस वॉलटिंयर्स, स्वधारा, उज्जवला आदि योजनाओं को ग्राम स्तर पर लागू करना। महिला सशक्तिकरण के लिए विद्यार्थियों की सहायता से जन चेतना, विभिन्न विभागों के साथ कंवर्जेस प्लेटफार्म के रूप में। ग्राम स्तर पर स्वयं सहायता समूहों में सशक्तीकरण व जागरूकता बढ़ाना।
इस तरह से मिलता है बजट
योजना की राशि केंद्र व राज्य सरकार क्रमश: ६० व ४० प्रतिशत वहन कर रही है। जिला स्तरीय केंद्र के लिए लगभग बारह लाख रुपए वार्षिक बजट दिया जा रहा है। ब्लॉक स्तरीय केंद्र के लिए ३६.३६ लाख रुपए वार्षिक बजट हर जिले में दिया जा रहा है।