IAS sachin Gupta Biography in hindi : भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा में तीसरे स्थान पर रहे IAS सचिन गुप्ता से बातचीत
सीकर. व्यक्ति को कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। जो भी करें मन से करें। पढ़ाई इसलिए नहीं करनी कि अच्छा पद प्राप्त करना है, पैसा कमाना है, मौज मस्ती या पार्टियां करनी है। पढ़ाई इसलिए होनी चाहिए कि हम समाज में, देश में और व्यवस्था में परिवर्तन ला सकें। इसका माध्यम कोई सा भी हो सकता है। अंतिम छोर पर बैठे जरूरतमंद व्यक्ति को भी वे सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए जो प्रथम पंक्ती में बैठे व्यक्ति को मिल रही है। मैं लगातार आठ बार परीक्षा में फेल हो गया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। माता-पिता का सपोर्ट मिला और इसी वर्ष भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा में पूरे देश में तीसरे स्थान पर रहा। यह कहना है वर्तमान में कॉर्पोरेट मंत्रालय में सहायक निदेशक सचिन गुप्ता का। पेश है उनसे साक्षात्कार के प्रमुख अंश।
सवाल-पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या रही?
जवाब- मैं हरियाणा के सिरसा का रहने वाला हूं। पिता सुदर्शन गुप्ता खेती के कार्य से जुड़े हैं, जबकि मां सुषमा पास के गांव के सरकारी विद्यालय में सरकारी शिक्षक हैं। शुरुआत से बारहवीं तक की पढ़ाई निजी स्कूल में हुई। इसके बाद थापर से मैकेनिकल से बीटेक किया।
सवाल-आइएएस बनने का सफर कैसा रहा?
जवाब-कॉलेज में पढाई के समय ही ठान लिया था, समाज व परिवर्तन लाने के लिए कुछ करना है। बीटेक करने के बाद गुडगांव में कार कम्पनी में कार्य शुरू किया, लेकिन वहां मन को संतुष्टी नहीं मिली। यहां रहकर लगा कि निजी क्षेत्र में रहकर परिवर्तन लाना इतना आसान नहीं है।
सवाल- तैयारी कैसे की, कहां की?
जवाब- गुडगांव की नौकरी छोडऩे के बाद दिल्ली चला गया तैयारी करने। इसके बाद बेंगलुरु में भी तैयारी की। करीब ढाई साल तक नियमित तैयारी की। इस दौरान समाज व परिवार से भी दूर रहा।
सवाल- कोचिंग जरूरी है सेल्फ स्टेडी?
जवाब- महत्वपूर्ण तो सेल्फ स्टेडी है। कोचिंग आपको एक राह दिखा सकती है, अगर आपने क्लास में खूब पढ़ लिया, लेकिन उसे आकर घर नहीं पढ़ा तो सब बेकार है। आजकल ऑनलाइन वेबसाइट व यूट्यूब पर पढऩे के लिए बहुत कुछ है।
सवाल- आइएएस के लिए कौन सा विषय लें, कितनी देर पढ़ाई करें?
जवाब-यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल है। विषय लेना व्यक्ति की रुची पर निर्भर करता है। उसे किस विषय की पढ़ाई में आनंद आ रहा है। उसकी किस विषय पर ज्यादा मजबूत पकड़ है। मेरा मानना है कि जिस विषय से आप स्नातक कर रहे हो आइएएस में भी वे ही विषय लेने चाहिए। बात कितनी देर पढ़ाई करने की है तो घंटे मायने नहीं रखते। महत्वपूर्ण यह है कि आप मन से कितनी देर पढ़ रहे हो। टॉपिक क्लियर होने चाहिए। उस टॉपिक पर आपका कितना कमांड है, यह महत्वपूर्ण है।
सवाल- आइएएस बनने के लिए तैयारी कैसे करें?
जवाब-सबसे महत्वपूर्ण है आप हाथ से लिखकर तैयारी करें। पिछले वर्षों का सलेबस हाथ से लिखें। प्रिंट नहीं लें। प्रिंट बहुत सारे पड़े रहते हैं। पिछले दस वर्षों के सवाल देखें, उनको समझें। भले ही हमारे बिल्कुल समझ नहीं आ रहे हों, लेकिन उन टॉपिकों को ज्यादा पढ़ें। व्यक्तिव का तुलनात्मक अध्ययन करें।
एनसीआरटीई की पुस्तकें पढ़ें। कई मेरे दोस्त पढऩे में मेरे से ज्यादा होशियार थे, लेकिन वे फेल हो गए, क्योंकि वे निर्धारित शब्दों में अपनी बात ही नहीं कह सके। इसलिए लिखकर तैयारी करें। शुरू में लिखने में आपको समय ज्यादा लगेगा, गलतियां खूब होंगी, लेकिन यही गलतियां आपको सफलता के शिखर पर पहुंचाएंगी।
सवाल? अब तक के सफर में क्या परेशानी आई?
जवाब- परेशानियों की लिस्ट बहुत लंबी है। मैं आइएएस की तैयारी करने से पहले छोटी-छोटी परीक्षाओं में लगातार आठ बार फेल हो गया। खुद को हारा हुआ मानने लग गया था, पिताजी के सामने फोन पर खूब रोता था, लेकिन मन में कुछ करने की ठान रखी थी। जब आप परेशानी में हो माता-पिता से जरूर बात करें। सकारात्मक बात करने वालों से मिलें। मुझे परेशानी के समय में पिता ने खूब सपोर्ट किया। पापा कहते हैं आप सिद्धत से लग जाओ, हिम्मत मत हारो, फल की चिंता मत करो, सफलता जरूर कदम चूमेगी।
सवाल- आपका कोई सपना, कोई मलाल?
जवाब- मलाल कोई नहीं है। सपना है परिवर्तन लाने का। वह छोटे से छोटा भी हो सकता है। जब कॉलेज में पढ़ता था, तब एक दोस्त एक एनजीओ की ओर से संचालित निजी संस्थान में निशुल्क पढ़ाने जाता था। एक दिन मैं भी पढ़ाने गया, वहां देखा बड़े-बड़े बच्चों को दो और दो जोड़ चार होता है यह नहीं आता। इंजीनियरिंग का छात्र था, लेकिन मेरे समझ में नहीं आया इनको दो और दो चार होते हैं यह कैसे समझाऊं।
मां शिक्षक थी, उनको समस्या बताई, उन्होंने कहा कल बच्चों के लिए एक किलो एपल लेकर जाना। फिर दो-दो बांटकर समझाना। मैंने ऐसे ही किया और वे समझ गए। उसके बाद मन में ठानी कि ऐसे तबके लिए परिवर्तन लाना है जो समाज की अंतिम पंक्ति पर बैठा है। उन्हीं के लिए व्यस्था में परिवर्तन लाना है। सभी समान रहें।
सवाल- सिविल सेवा की परीक्षा में लाखों विद्यार्थी बैठते हैं? आपको विश्वास था पूरे देश में तीसरा स्थान आ जाएगा?
जवाब- मुस्कुराते हुए....। पढ़ाई पूरे मन से की थी, बेंगलुरु में जहां कोचिंग कर रहा था वहां टेस्ट होता था, टेस्ट लेने वाले कहते थे आप टॉप दस में आओगे। तब विश्वास नहीं हुआ। परिणाम वाला दिन भी आ गया। मैंने यूपीएससी की वेबसाइट पर परिणाम देखा, मेरा नाम तीसरे स्थान पर था। फिर भी विश्वास नहीं हुआ। पहले नाम के स्पेलिंग का एक-एक अक्षर दो बार चेक किया। फिर रोल नंबर का एक एक अंक का मिलान किया। इसके बाद घर फोन करने ही वाला था, कि अखबार व चैनल वालों के फोन आने शुरू हो गए,तब विश्वास हुआ।
सवाल-युवाओं के लिए कोई संदेश?
जवाब- जो भी करें मन से करें। व्यवस्था में परिवर्तन लाएं। भ्रष्टाचार से दूर रहें। नवाचार करें। समाचार पत्र नियमित पढ़ें। मुद्दों को समझें। पद या पैसे पार्टी या मौज मस्ती करने के लिए नहीं है। नवाचार करें, चाहे वे छोटे ही हों। एक नए भारत का निर्माण करें।
आखिरी सवाल- आप अभी कॉर्पोरेट मंत्रालय में सहायक निदेशक हैं, आप का मंत्रालय क्या नया कर रहा है या नया करोगे?
जवाब- कोई नई कंपनी खोलना चाहता है उसके लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। सभी कार्य करने की निर्धारित अवधि तय कर दी गई है, यानि आपको निश्चित समय में यह कार्य तो करना ही होगा। इससे भ्रष्टाचार रुकेगा। कई कम्पनियां अपने शेयर होल्डर को पूरी जानकारी नहीं देती थी, अब उनको पूरी जानकारी देनी पड़ेगी। उनको हर हाल में वार्षिक रिर्टन दाखिल करनी ही होगी।