
शिक्षानगरी सीकर ने स्वच्छता रैकिंग में इंदौर की तरह चमकने के लिए अब नवाचार के साथ कदमताल की है। यदि शहरी सरकार के नवाचार को आमजन का पूरा साथ मिले तो पूरे देश की दाद मिलने के साथ नगर परिषद मालामाल भी हो सकती है। शहरी सरकार की ओर से पायलट प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट पर गीले कचरे से नानी बीड़ में खाद बनाने का काम शुरू किया था। शहरी सरकार पिछले एक साल में लगभग 15 लाख रुपए की खाद किसानों को बेच चुकी है। संभवतया इस तरह का नवाचार करने वाली नगर निकायों में एकमात्र सीकर नगर परिषद है। नगर परिषद की ओर से तैयार खाद को फिलहाल दो रुपए किलो के आधार पर स्थानीय किसानों को बेचा जा रहा है। गुणवत्ता के मापदंडों पर खाद के खरा उतरने की वजह से लगातार डिमांड भी बढ़ रही है। परिषद आयुक्त शशिकांत शर्मा ने बताया कि इस साल 25 टन खाद तैयार करने का लक्ष्य लिया है।
परिषद को यह चाहिए साथ: अलग-अलग डाले सूखा और गीला कचरा
नगर परिषद ने अपने नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए अब क्लीन सीकर अभियान शुरू किया है। परिषद की ओर से अब शहरवासियों को गीला व सूखा कचरा अलग-अलग डालने की अपील को लेकर अभियान शुरू किया है। परिषद आयुक्त के साथ अन्य कर्मचारी भी नियमित रूप से समझाईश कर रहे है। अगले चरण में सड़क पर कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना लगाकर भी कार्रवाई की जाएगी।
इन नवाचारों से क्लीन सिटी के दावे....
1. कचरे से खाद: 25 टन कचरे का लक्ष्य
परिषद ने खाद बनाने के नवाचार को इस साल और आगे बढ़ाने का लक्ष्य लिया है। इसके तहत परिषद की ओर से अब हर साल 25 टन कचरा बनाने का लक्ष्य तय किया है। फिलहाल नानी बीड़ इलाके में परिषद की ओर से खाद तैयार की जा रही है। खास बात यह है कि यहां खाद से सब्जी भी तैयार की जा रही है। इन सब्जियों को भी छात्रावास व स्थानीय बाजार में बेचा जाएग।
2. फूल-पत्ते और घास से खाद:
खाद बनाने की दिशा में शहरी सरकार ने इस साल एक और नवाचार किया है। इसके तहत शहर के पार्क से एकत्रित होने वाली घास, फूल व पत्तों से भी खाद बनाना शुरू किया है। परिषद की ओर से इस खाद से ही सड़क किनारे लगे पौधों में खाद भी दी जा रही है।
3. परकोटे में रात्रिकालीन सफाई:
क्लीन सीकर-ग्रीन सीकर की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए परकोटे में नियमित रुप से रात्रिकालीन सफाई शुरू की है। वहीं शहर के मुख्य बाजाारों से अब दिन में भी कचरा उठाया जा रहा है। वहीं शहर को क्लीन बनाने के लिए 15 जोन में बांटा गया है। सभी सफाई जोन प्रभारियों की तरफ से दिन में दो बार निरीक्षण भी किया जा रहा है।
ऐसे तैयार हो रही कचरे से खाद
गीले कचरे से सामान्य तरीके से 90 में खाद तैयार हो जाती है। परिषद के अधिकारियों ने बताया कि खाद बनाने के लिए गड्ढ़ा खोदकर गीले कचरे का ढेर बनाया जाता है। इस ढेर को हर सप्ताह जेसीबी की सहायता से पलटना होता है। साथ ही इसमें पानी व अन्य सामग्री डाली जाती है। औसतन 90 दिन में खाद बनकर तैयार हो जाती है।
खाद गुणवत्ता में भी खरी, बढ़ रही डिमांड: आयुक्त
गीले कचरे तैयार होने वाली खाद की गुणवत्ता भी पिछले दिनों जांच कराई थी। इसमें खाद गुणवत्ता के मापदंडों पर खरी उतरी है। खाद की लगातार डिमांड भी बढ़ रही है। यदि आमजन की इस मुहिम में सहभागिता मिले तो हर साल 25 टन कचरा तैयार हो सकता है। शहरी क्षेत्र में नवाचार के तहत रात्रिकालीन सफाई भी शुरू की है।
शशिकांत शर्मा, आयुक्त, नगर परिषद सीकर