
शाही लवाजमे के साथ निकली भव्य शोभायात्रा (पत्रिका फोटो)
सीकर: धर्मनगरी सीकर के लिए गुरुवार का दिन अत्यंत ऐतिहासिक, भावुक और भक्तिमय रहा। आचार्य धर्मसागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज का 39 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने गुरुदेव की समाधि स्थली पर ससंघ चातुर्मास हेतु भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस पावन अवसर पर समूचा जैन समाज श्रद्धा और उल्लास से सराबोर नजर आया।
आचार्य श्री के आगमन पर शहर में एक विशाल और दिव्य शोभायात्रा निकाली गई। हाथी, घोड़े, शाही लवाजमे और ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ यह यात्रा देवीपुरा से प्रारंभ होकर सिल्वर जुबली रोड, स्टेशन रोड, अहिंसा सर्किल, जाट बाजार, कोतवाली रोड, बावड़ी गेट और बजाज रोड होते हुए चातुर्मास स्थल 'पार्श्वनाथ भवन (दंग की नशियां)' पहुंची।
पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने कई जगहों पर भव्य स्वागत द्वार बनाए। घरों और दुकानों से आचार्य श्री पर भावभीनी पुष्पवर्षा की। जगह-जगह मंगल आरती उतारकर आशीर्वाद प्राप्त किया। जाट बाजार में वर्धमान स्कूल के छात्र-छात्राओं ने सुमधुर बैंड वादन से सभी का मन मोह लिया।
सकल जैन समाज के विवेक पटौदी ने बताया कि यह क्षण पूरे समाज के लिए बेहद खास है। वर्ष 1986 में आचार्य वर्धमान सागर जी अपने गुरुदेव 'धर्म शिरोमणि' आचार्य धर्मसागर जी महाराज के स्वास्थ्य लाभ हेतु लगभग पांच महीने सीकर में विराजे थे।
इसके बाद वर्ष 1987 में इसी पावन धरा पर आचार्य धर्मसागर जी की समाधि हुई थी। अब 39 वर्ष बाद उनके शिष्य का पुनः आगमन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक कर देने वाला पल है।
पार्श्वनाथ भवन दंग की नशियां में 28 जुलाई से चातुर्मास के धार्मिक अनुष्ठान विधिवत शुरू होंगे। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रातः काल भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना किया जाएगा। आचार्य श्री के मुखारविंद से आध्यात्मिक उपदेश दिया जाएगा।
साथ ही धार्मिक आयोजनों के तहत विभिन्न सांस्कृतिक एवं तप-साधना के कार्यक्रम होंगे। इस चातुर्मास काल में सीकर सहित देशभर से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है, जिससे पूरा शहर भक्ति के रंगों में रंगा रहेगा।
Updated on:
23 Jul 2026 11:47 am
Published on:
23 Jul 2026 11:47 am
