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Sikar: 3 नाबालिग बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, सिलिकोसिस से गई जान, कुछ महीने पहले ही हुई थी 2 सगे भाइयों की मौत

सीकर के स्यालोदड़ा गांव में सिलिकोसिस से पीड़ित मनोज कुमार की मौत हो गई जिससे पत्नी और 3 नाबालिग बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। सरकारी सहायता की उम्मीद में उनका आवेदन मेडिकल बोर्ड में लंबित रहा।
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सीकर

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Akshita Deora

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Updated: 24 Jul 2026, 8:01 AM IST

Silicosis death

मृतक की फाइल फोटो: पत्रिका

Death From Silicosis: सीकर के पाटन इलाके के गांव स्यालोदड़ा में सिलिकोसिस ने एक और परिवार को उजाड़ दिया। कई महीनों से इस लाइलाज बीमारी से जूझ रहे मनोज कुमार ने दम तोड़ दिया। सरकारी सहायता और सिलिकोसिस प्रमाण पत्र की उम्मीद लगाए बैठे मनोज का आवेदन मेडिकल बोर्ड में लंबित ही रहा। उसकी मौत के बाद पत्नी सहित 3 नाबालिग बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

स्यालोदड़ा और आसपास के क्षेत्र में संचालित दर्जनों क्रेशर इकाइयों से उड़ने वाली धूल ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। सबसे अधिक प्रभावित वे मजदूर हैं जो वर्षों तक क्रेशर इकाइयों में कार्य करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पांच से सात वर्ष तक लगातार धूल के बीच काम करने वाले श्रमिक सिलिकोसिस की चपेट में आ जाते हैं। बीमारी बढ़ने पर मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है और धीरे-धीरे उन्हें ऑक्सीजन के सहारे जीवन गुजारना पड़ता है। महंगे इलाज के बावजूद अधिकांश मरीजों की असमय मौत हो जाती है।

ग्रामीणों के अनुसार अकेले सीकर के स्यालोदड़ा गांव में ही इस बीमारी से कई लोगों की जान जा चुकी है। कुछ माह पहले एक ही परिवार के दो सगे भाइयों की भी सिलिकोसिस से मौत हो गई थी। परिजनों ने बताया कि मनोज ने सिलिकोसिस पीड़ित के रूप में सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था लेकिन चिकित्सा विभाग ने उसका आवेदन निरस्त कर दिया। जबकि निजी अस्पताल की जांच में उसे सिलिकोसिस से पीड़ित बताया गया था। इसके बाद उसने मेडिकल बोर्ड से दोबारा परीक्षण के लिए आवेदन किया था जो अभी तक लंबित था। मनोज ने 18 जून को आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में ग्रामीणों के साथ तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग भी की थी, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। सहायता मिलने की उम्मीद के बीच बुधवार शाम मनोज ने दम तोड़ दिया।

मनोज के परिवार का एक और युवक अस्पताल में

वहीं ग्रामीणों ने बताया कि मनोज के परिवार का ही एक अन्य युवक मनजीत भी सिलिकोसिस की गंभीर अवस्था से जूझ रहा है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह घर पर ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। गांव में ऐसे कई अन्य मरीज भी हैं जिनका उपचार चल रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्रेशर प्रभावित क्षेत्रों में विशेष चिकित्सा शिविर लगाकर सभी संभावित मरीजों की जांच कराई जाए, लंबित सिलिकोसिस प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण किया जाए तथा पात्र परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही क्रेशर इकाइयों से फैल रहे धूल प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए भी ठोस कार्रवाई की जाए।