
Rajasthan CM Free Medicine Scheme: औषधि नियंत्रण विभाग की ओर से मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है लेकिन हालात इसके ठीक उलट हैं। प्रदेश में 16 से 31 जुलाई के बीच सरकारी अस्पतालों और दवा केंद्रों से लिए गए सैंपलों की जांच में कई महत्वपूर्ण दवाएं अमानक पाई गई हैं।
जांच में हार्ट रोगियों के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा और जीवन रक्षक दवाएं तक गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो गई हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मरीजों को इलाज मिल रहा है या उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जांच में एंजाइना के दर्द और रक्तचाप को नियंत्रित करने वाली टैबलेट निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरी। वहीं गंभीर एलर्जी, अस्थमा और आपात स्थितियों में उपयोग होने वाला जीवनरक्षक इंजेक्शन भी जांच में फेल हो गया। ड्रग कंट्रोलर राजस्थान अजय फाटक ने सभी जिलों से इन दवाओं को बाजार से वापस मंगवाने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान में लंबा-चौड़ा सरकारी अमला होने के बावजूद हर महीने औसतन करीब डेढ़ दर्जन दवा के सैंपल फेल हो रहे है। इसके बावजूद खरीद प्रक्रिया, गुणवत्ता परीक्षण और आपूर्ति व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा। जबकि लगातार दवाएं जांच में फेल हो रही हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही। जिससे ऐसी दवाओं को मरीजों तक पहुंचने से पहले रोका जा सके। आमतौर गंभीर बीमारियों के मरीज इन्हीं दवाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में हार्ट की दवा और जीवन रक्षक इंजेक्शन तक का जांच में फेल होना तकनीकी खामी नहीं, मरीजों के जीवन से सीधा खिलवाड़ है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार कई दवाओं में घुलनशीलता (डिसॉल्यूशन) निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिली। विशेषज्ञों के अनुसार मरीज गोली शरीर में समय पर और सही मात्रा में नहीं घुलेगी तो उसका पूरा असर नहीं होगा। जीवन रक्षक दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होना सीधे मरीज की जान पर जोखिम बढ़ाने वाला मामला है जांच में हार्ट और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को दी जाने वाली निफेडिपाइन सस्टेंड रिलीज टैबलेट निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरी।
ये दवा एंजाइना के दर्द को रोकने और रक्तचाप नियंत्रित रखने के लिए दी जाती है। वहीं गंभीर एलर्जी, अस्थमा और आपात स्थितियों में उपयोग होने वाला बीटामेथासोन सोडियम फॉस्फेट इंजेक्शन भी अमानक मिला। इसके अलावा संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सीफिक्सिम-ओफ्लॉक्सासिन, सेफिक्सिम विद लैक्टिक एसिड बैसिलस, मेट्रोनिडाजोल, एलर्जी की लेवोसेटिरिज़िन, तेज दर्द की टैपेंटाडोल, तथा फॉर्मलाडेहाइड सॉल्यूशन जैसे उत्पाद भी गुणवत्ता जांच में फेल हुए।