
प्रदेश की सरकारी स्कूलों का फिर एकीकरण होगा। इस बार भी प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों को नजदीकी सीनियर सैकंडरी स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। हालांकि इस बार एकीकरण का आधार नामांकन नहीं स्कूल की कक्षाएं होगी। जिसमें कक्षा 6 से 12 व 9 से 12 तक संचालित 186 सरकारी स्कूलों में एक साथ कक्षा एक सेे 12 तक संचालन के लिए नजदीकी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों को उनमें समन्वित किया जाएगा। इसे लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक आशीष मोदी ने आदेश जारी कर संभाग स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है।
186 स्कूलों में एकीकरण, एनईपी का हवाला
शिक्षा निदेशालय के अनुसार प्रदेश में 186 स्कूल में प्राथमिक कक्षाओं का संचालन नहीं हो रहा। इनमें कक्षा 6 से 12 की 131 तथा कक्षा 9 से 12 के 55 स्कूल शामिल है। इनमें नजदीकी स्कूलों को मर्ज कर यहां कक्षा एक से 12 का एक साथ संचालन होगा। एकीकरण के पीछे निदेशक ने नई शिक्षा नीति, अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षण व्यवस्था व 15 फरवरी को शिक्षा मंत्री की बैठक के फैसले का हवाला दिया है।
कमेटी में इनको किया शामिल
संभाग स्तर पर गठित एकीकरण की टीम का संयोजक संबंधित संयुक्त निदेशक को बनाया गया है। जिसमें सीडीईओ व समग्र शिक्षा डीपीसी, डीईओ प्रारंभिक शिक्षा, डाइट प्रतिनिधी तथा एक प्रधानाचार्य या समकक्ष महिला शिक्षा अधिकारी को सदस्य तथा डीईओ (माध्यमिक) को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।
इन मुद्दों पर मंथन करेगी कमेटी
कमेटी इस बात की जांच करेगी कि कक्षा एक से 12 की बजाय कक्षा 6 से 12 व 9 से 12 का स्कूल का संचालन किन कारणों से किया जा रहा है। दूसरा, यदि इन स्कूलों में नजदीकी स्कूल मर्ज करें तो कक्षा 1 से 12 तक संचालन के लिए उसका भवन पर्याप्त होगा या नहीं? इसके अलावा स्कूल मर्ज होने पर किसी स्कूल की छात्राओं को आने- जाने में तो किसी असुविधा या अराजक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। इन तीन मुद्दों पर मंथन के बाद कसौटी पर सही पाए जाने पर स्कूलों का एकीकरण किया जाएगा।
इनका कहना है...
पिछले कार्यकाल में भी भाजपा सरकार ने एकीकरण के नाम पर 19 हजार 900 स्कूल बंद की थी। अब फिर स्कूलों को समन्वित कर बंद करने की आशंका है। यदि आरटीई के प्रावधानों के खिलाफ कार्य हुआ तो शिक्षक समुदाय एकजुट होकर छात्र व अभिभावक हित में आंदोलन करेगा।
उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत)