
महात्मा गांधी स्कूल अब होंगे हिंदी माध्यम,पत्रिका फोटो
Rajasthan Education: राजस्थान सरकार ने कम नामांकन वाले 300 महात्मा गांधी स्कूलों को हिंदी माध्यम में भी संचालित करना तय किया है। उन स्कूलों की ब्लॉकवार सूची के साथ बकायदा नामांकन और शिक्षकों की संख्या जारी कर निदेशालय ने इस संबंध में जिला शिक्षा विभागों से सात दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। सरकार के इस फैसले को नवाचार के साथ सियासी वार के रूप में भी देखा जा रहा है। क्योंकि इन स्कूलों में सबसे ज्यादा 20 स्कूलें पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ की है, जिन्होंने शिक्षा मंत्री रहते हुए सबसे ज्यादा महात्मा गांधी स्कूलें खोले थे।
चूंकि सरकार बदलने के बाद से ही शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पीसीसी चीफ पर हमलावर रहते हुए महात्मा गांधी स्कूलों को बंद करने की बात कई मंचों से कह चुके हैं। ऐसे में कम नामांकन के आंकड़ों के साथ लक्ष्मणगढ़ की सबसे ज्यादा स्कूलों में हिंदी माध्यम के बोर्ड लगाने की कवायद को भी उनके सियासी हमले के तौर पर देखा जा रहा है।
राजस्थान में महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का संचालन 2019-20 में हुआ था। शुरुआत में ये जिला मुख्यालयों पर शुरू हुई। पीसीसी चीफ डोटासरा के शिक्षा मंत्री काल में 2021 में इन्हें पांच हजार की आबादी वाले गांवों व कस्बों में भी शुरू कर दिया गया।
सरकार बदलते ही शिक्षा मंत्री दिलावर ने बड़ी संख्या में खोली गई महात्मा गांधी स्कूलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। थर्ड क्लास तो कभी भांग खाकर खोले गए स्कूल बताते हुए उन्होंने इनकी समीक्षा कर बंद करने तक की बातें विधानसभा सहित विभिन्न मंचों से कही थी। लक्ष्मणगढ़ में सबसे ज्यादा स्कूलों में हिंदी माध्यम का संचालन को भी उसी सियासी चाल के रूप में देखा जा रहा है।
एक्सपर्ट्स की मानें तो अंग्रेजी के साथ हिंदी माध्यम के संचालन से गांवों की महात्मा गांधी स्कूलों में हिंदी माध्यम में नामांकन बढ़ने की संभावना ज्यादा रहेगी। ऐसे में संभव है कि बाद में इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम खत्म कर इन्हें फिर से सामान्य स्कूल ही बनाए जा सकते हैं।
सूची के अनुसार प्रदेश की जिन 300 महात्मा गांधी स्कूलों में नामांकन न्यून बताया गया है उनमें सबसे ज्यादा 45 स्कूलें सीकर जिले की है। इनमें भी सबसे ज्यादा 20 स्कूलें लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र की है। इसी के चलते इसे राजनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है। हालांकि विभाग का तर्क है कि स्कूलों का चयन कम नामांकन के आधार पर निष्पक्ष ढंग से होगा।
Updated on:
04 Jul 2026 08:38 am
Published on:
04 Jul 2026 08:36 am
