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मानसून से पहले खुशखबरी: शेखावाटी को 123 दिन में मिलेगा सालभर का पेयजल,बिना मोटर के पहुंचेगा 1917 क्यूसेक पानी

Yamuna water project Rajasthan : दिल्ली में हुए यमुना जल परियोजना के एमओए ने शेखावाटी को पानी की उम्मीद से तरबतर कर दिया है। करीब 34 हजार 102 करोड़ रुपए की इस परियोजना से सीकर, चूरू व झुंझुनूं को यमुना नदी की बाढ़ का 1917 क्यूसेक पानी मिलेगा।
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सीकर

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kamlesh sharma

Jun 30, 2026

Yamuna water project Rajasthan

Yamuna water project Rajasthan

सीकर। एक दोहा है कि 'शेखावाटी सुंदरी, पनघट खड़ी उदास। जितने गहरे कूप है, उतनी गहरी प्यास।' पर सोमवार को दिल्ली में हुए यमुना जल परियोजना के एमओए ने शेखावाटी को पानी की उम्मीद से तरबतर कर दिया है। करीब 34 हजार 102 करोड़ रुपए की इस परियोजना से सीकर, चूरू व झुंझुनूं को यमुना नदी की बाढ़ का 1917 क्यूसेक पानी मिलेगा। ये पानी बरसात के जुलाई से अक्टूबर महीनों में 123 दिन मिलेगा।

चूरू के हंसियावास में जलाशय में भंडारण कर अंचल में सालभर वितरित किया जाएगा। एमओए के बाद अब भूमि अधिग्रहण के साथ पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है। खास बात ये भी है कि पहले ये पानी मोटरों के जरिए अंचल तक पहुंचाया जाना था। पर अब हंसियावास से 110 मीटर उंचे हथिनी बैराज से ग्रेविटी फ्लो से पानी छोड़ना तय किया गया है। इससे बिना मोटर ही पानी तेज गति से शेखावाटी तक पहुंच सकेगा।

पहले मिलेगा पेयजल

परियोजना दो चरणों की है। इसमें पहले चरण में पीने का पानी मिलेगा। दूसरे चरण में सिंचाई का पानी मिलने की संभावना है। हालांकि सिंचाई के पानी को लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं हुई है। क्योंकि समझौते में पेयजल के साथ दूसरे चरण में अतिरिक्त पानी के वितरण की संभावना का तो जिक्र है, लेकिन सिंचाई के पानी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। एक्सपर्ट्स की मानें तो सबकुछ ठीक रहने पर करीब दो साल में अंचल को पहले चरण का पानी मिलना शुरू हो जाएगा।

इस रास्ते पहुंचेगा हमारा पानी

योजना के तहत शेखावाटी को यमुना का पानी हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज के ताजेवाला हेड के जरिए करीब 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाकर मिलेगा। 10 फीट डायस की तीन पाइपों से ये पानी चूरू के हंसियावास जलाशय तक पहुंचेगा। एक अतिरिक्त पाइप से हरियाणा के भिवानी, चरखीदादरी और हिसार जिलों में भी ये पानी पहुंचेगा।परियोजना के तहत निरीक्षण सड़क, कृत्रिम जलाशय और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। राजस्थान सरकार इसकी पूरी डीपीआर तैयार कर केंद्रीय जल आयोग को भेज चुकी है।

ज्यादा मिल सकता है पानी

शेखावाटी को यमुना के बाढ़ का पानी मिलेगा। चूंकि यमुना की बाढ़ का पानी अक्सर दिल्ली तक के इलाकों को डूबो देता है। ऐसे में यदि बाढ़ का पानी ज्यादा आया तो हरियाणा सरकार उसे भी शेखावाटी में देकर यहां की मात्रा बढ़ा सकती है। इससे दिल्ली को बाढ़ से और शेखावाटी को पानी से राहत मिल सकेगी।

नॉलेज: एक क्यूसेक में 28.3 लीटर पानी

क्यूसेक पानी के बहाव को मापने की इकाई है। इसका पूरा नाम क्यूबिक फीट प्रति सेकंड है। यानी यदि किसी नदी, नहर या बांध से एक सेकंड में एक घन फुट पानी बहता है, तो उसे एक क्यूसेक कहा जाता है। एक क्यूसेक लगभग 28.3 लीटर प्रति सेकंड के बराबर होता है।

इनका कहना है

पांच बिसलपुर बांध जितना पानी
राज्यसभा सदस्य घनश्याम तिवाड़ी ने बताया कि यमुना जल के एमओए के बाद शेखावाटी क्षेत्र की वर्षों की यमुना जल की मांग पूरी हो सकेगी। इससे इस क्षेत्र की पानी की समस्या का हल हो सकेगा। लगभग 1917 क्यूसेक पानी इस क्षेत्र को मिलेगा, जो पांच बीसलपुर बांध जितना पानी है।

शेखावाटी को मिलेगा मीठा पानी
पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ यमुना जल परियोजना से शेखावाटी को पीने का मीठा पानी मिलेगा और पेयजल समस्या का समाधान होगा। ये काफी महत्वपूर्ण परियोजना है।

सफल हुआ अभियान

डायरेक्टर सुजला शेखावाटी समिति के डायरेक्टर डॉ. नेकीराम आर्य ने बताया कि करीब 3 वर्ष पहले सांसद घनश्याम तिवाड़ी के मार्गदर्शन में गठित सुजला शेखावाटी समिति का अभियान सफल हो गया है। समिति ने यमुना जल का मुद्दा विभिन्न मंचों से उठाने के अलावा मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक के सामने रखा था।

32 साल में यूं बढ़ा समझौता

1994: यमुना जल के लिए हरियाणा व राजस्थान में 1917 क्यूसेक पानी का समझौता हुआ, लेकिन पानी पहुंचा नहीं।

2001 : हथनीकुंड बैराज से पानी मिलना तय हुआ।

2003: राज्य ने 2003 में हरियाणा की नहरों को रिमॉडलिंग कर राजस्थान में यह जल लाने की वार्ता की।

2017: अंडरग्राउंड सप्लाई से पानी के लिए हरियाणा सरकार को एमओयू भेजा गया। हरियाणा की सहमति नहीं मिली।

2018 : यमुना का पानी पाइपलाइन के जरिए राजस्थान पहुंचने पर विचार विमर्श।

2024 : यमुना जल को राजस्थान लाने के लिए हरियाणा व केंद्र सरकार के साथ 17 फरवरी 2024 को एमओयू हुआ। इसके बाद डीपीआर बनी।

2026: परियोजना को लेकर दिल्ली में एमओए हुआ।