
सीकर. सीकर के सियासी रण में हार-जीत के रिश्तों के बीच अनूठी भी कहानी है। दांतारामगढ़ विधानसभा सीट से पिछले दो चुनाव में पिता और पुत्र एक सियासी दिग्गज को हरा सके है। पिछले चुनाव में जहां दांतारामगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष चौधरी नारायण सिंह ने हरीश कुमावत को लगभग ५५० वोटों से हराया था। वहीं इस चुनाव में उनका मुकाबला चौधरी नारायण सिंह के बेटे वीरेन्द्र सिंह से हुआ। इस बार भी हरीश कुमावत को नजदीकी मुकाबले में हार मिली। इस बार हरीश कुमावत ९२० मतों से चुनाव हार गए। इसी तरह महादेव सिंह खंडेला ने इस चुनाव में चिकित्सा राज्य मंत्री बंशीधर बाजिया को हराया। इससे पहले महादेव सिंह खंडेला यहां से बंशीधर बाजिया के पिता गोपाल खंडेला को भी हरा चुके है।
जीत का अंतर नोटा से भी कम
सीकर जिले में दो सीटों पर हार-जीत का अंतर नोटा से भी कम रहा। जिले की दांतारामगढ़ व फतेहपुर सीट पर भी एेसा ही हुआ। दांतारामगढ़ विधानसभा में हार-जीत का अंतर ९२० रहा। जबकि यहां ११०० से अधिक दबा। इसी तरह फतेहपुर विधानसभा सीट की बात करें तो यहां ८६० मतों से कांग्रेस ने जीत हासिल की। जबकि नोटा को इससे ज्यादा लोगों ने पंसद किया।
नवलगढ़ में भी एेसी तस्वीर: राजकुमार ने
दोनों को हराया
नवलगढ़ के रण में भी एेसी तस्वीर है। यहां डॉॅ. राजकुमार शर्मा पिता-पुत्र की जोड़ी को हरा चुके है। पहले राजकुमार ने जगदीश सैनी को हराया। वहीं इस बार के चुनाव में रवि सैनी को हराया। इसी तरह शेखावाटी के रण में दो और नेताओं की जोड़ी है जो हार की हैट्रिक बना चुकी है।
चूरू व झुंझुनं ने बचाई लाज, सीकर खाली हाथ
भाजपा की शेखावाटी में चूरू व झुंझुनूं जिले ने लाज बचा दी है। वहीं सीकर जिले में भाजपा पूरी तरह खाली हाथ रही है। जबकि पिछले चुनाव में स्थिति एकदम विपरीत थी। यहां पिछले चुनाव में मोदी लहर में कांग्रेस को महज पांच सीटों पर संतुष्ट रहना पड़ा था।