सीकर

संरक्षण के अभाव में जर्जर होती विरासत

दांतारामगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर का नहीं है कोई धणी धोरी
2 min read
Mar 29, 2019
sikar hindi news
संरक्षण के अभाव में जर्जर होती विरासत

दांतारामगढ़ . दांतारामगढ़ में ऐतिहासिक धरोधर का कोई धणी धोरी नहीं है। सरंक्षण के अभाव में राजा महाराजाओं के जमाने की ऐतिहासिक विरासत दम तोड़ रही है। असामाजिक तत्व यहां अवांछित गतिविधियां कर रहे हैं।
वहीं भूमाफिया इस विरासत को अपने कब्जे मे लेना चाहते है। दांतारामगढ़ के दक्षिण दिशा में नदी के पास बॉडी कोठी के नाम से प्रसिद्ध स्थान पर पुराना कुआं व राजा महाराजाओं के जमाने की छतरियां है। पुराने समय में लोग इस कुएं का पानी पीतते थे।
कुएं का पानी सूखते ही लोगों ने आना छोड़ा
वहीं गांव के लोग दोपहर व शाम को इन छतरियों पर बैठकर गपशप किया करते थे, लेकिन जैसे जैसे कुएं का पानी सूख गया, लोगों का आवागमन कम हो गया। कई सालों से इस विरासत पर गांव वालों का आना जाना कम हो गया है वैसे वैसे भूमाफियों की नजर इस पर हो गई। यहां तक की करीब पांच साल पहले तो भूमाफिया ने इस स्थान पर कब्जे का प्रयास किया लेकिन गांव वालों के विरोध के कारण वे अपने मंसूबो पर कामयाब नहीं हो पाए। कस्बे के विवेक शर्मा ने बताया कि उक्त स्थान किसी की खातेदारी में है, इसके बावजूद उक्त स्थान को जमीन के मालिक ने ग्राम पंचायत को सरेंडर कर दिया। वहीं सुमेरसिंह बताते हैं कि छतरियां जर्जर हो रही है। छतरियों की सीढिय़ों को असामाजिक तत्वों ने तोड़ डाला।
पुरातत्व विभाग करे पहल
सुमेरसिंह ने कहा कि कि ऐतिहासिक विरासत को सरंक्षण की दरकार है। प्रशासन, पुरातत्व विभाग या ग्राम पंचायत धरोहर को कब्जे में लेकर इसका रखरखाव करे तो इसे बचाया जा सकता है। इस मामले में सरपंच मधु स्वामी का कहना है कि वे इसके लिए पुरातत्व विभाग को लिखेंगे।
बघेरे ने किया बकरी का शिकार
प्रीतमपुरी. समीप की ढाणी चेचीयान में गुरुवार को बघेरे ने बकरी का शिकार किया। रोहिताश्व गुर्जर ने बताया कि पशु पालक झाबरमल अपने पशुओं को चरा रहा था, अचानक बघेरा आया और एक बकरी को शिकार कर डाला। रोहिताश्व ने बताया कि कई बार बघेरे की दहाड़ सुनाई देती है। लोगों के साथ पशुपालकों में भी दहशत है वे भी जल्दी ही अपने पशुओं को अपने घरों में ले आते है। इससे पूर्व भी कई बकरियों को शिकार बना चुका है।

Published on:
29 Mar 2019 05:25 pm