सीकर

सोना छोड़ सपनों को साकार करने में जुटे नेताजी

सोना छोड़ सपनों को साकार करने में जुटे नेताजी
2 min read
Nov 30, 2018
sikar political nes
सोना छोड़ सपनों को साकार करने में जुटे नेताजी


आठ घंटे की नींद 2-3 घंटे में पूरी कर रहे नेताजी
सीकर. हारने के बाद प्राय: सुस्त होने और जीतने के बाद चैन से सोने वाले ‘नेताजी’ इन दिनों दिन-रात दौड़-धूप में जुटे हैं। छह-आठ घंटे की नींद महज 2-3 घंटे में पूरी कर रहे हैं। सीकर के विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों में से ज्यादातर तडक़े तीन से चार बजे उठ रहे हैं। इसके बाद रात करीब एक से दो बजे तक कभी जनसम्पर्क और दौरे, कभी बैठक और आगामी जोड़-तोड़ का दौर चलता है। ऐसे में नेताजी को आराम और नींद के लिए महज 2-3 घंटे मिल रहे हैं। उसमें भी नींद आंखों से दूर ही रहती है।
राजस्थान पत्रिका ने विभिन्न प्रत्याशियों की हालिया दिनचर्या पर नजर डाली तो यही स्थिति सामने आई। कहीं आमने-सामने की कांटे की टक्कर, कहीं त्रिकोणीय संघर्ष तो कहीं बागियों और भितरघात के कारण नेताजी की जमकर दौड़धूप हो रही है। अलसुबह से देर रात तक सतत दौड़धूप के बावजूद थकान का फिलहाल नामोनिशान नहीं है। धुआंधार प्रचार से घर लौटने के बाद भी देर तक पूरी सक्रियता से अगले दिन की रणनीति बनाते हैं और समीकरणों पर मंथन करते हैं।
करवट बदलते कट रही रातें
कुछ प्रत्याशियों, समर्थकों और परिजनों से बातचीत में सामने आया कि पूरा दिन प्रचार और भाषण में गुजर रहा है। रात को भी समर्थकों से लम्बी चर्चा के बावजूद नींद की बजाय चुनावी पैंतरे ही आंखों में घूमते हैं।
रात में पहुंचते हैं रूठों को मनाने
एक प्रत्याशी ने बताया कि अव्वल तो आंख लगती ही नहीं, लगे तो भी चुनाव से जुड़ी बातें ही जेहन में घूमती हैं। ऐसे में समय खराब करने की बजाय रात को रूठे हुए लोगों को मनाने का काम करते हैं।
एक्सपर्ट कमेंट: दिमाग ज्यादा एक्टिव हो गया है
चौबीस घंटे में 6-7 घंटे नींद जरूरी है। अन्यथा चिंता, निराशा, याददाश्त की कमी, चिड़चिड़ेपन जैसी शिकायतें हो सकती हैं। अभी चुनाव प्रचार के चलते प्रत्याशियों-नेताओं का दिमाग ज्यादा एक्टिव हो गया है। दिमाग जीत के लिए दांव-पेच में उलझा हुआ है। अच्छी नींद तो तब ही आएगी, जब विचारों की शांति होगी।
डॉ. शिवप्रसाद खेदड़, मनोचिकित्सक, एसो. प्रोफे.
डेमो पिक्स

Published on:
30 Nov 2018 06:49 pm