
सरकारी अस्पतालों में निशुल्क जांच योजना का लाभ आमजन तक पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि जिला अस्पताल में पिछले दो दिन से हार्मोन्ल जांच के रीएजेंट खत्म हो गए हैं। जबकि हाल में चिकित्सा विभाग ने निशुल्क जांच योजना को लेकर सख्ती बरतने के निर्देश दिए थे। अस्पताल की सैंट्रल लैब में रीएजेंट नहीं होने के कारण सवा सौ से ज्यादा मरीजों के सैम्पल तो ले लिए लेकिन उनकी हार्मोन्ल जांच नहीं हो सकी। अस्पताल में सीकर, नीमकाथाना, कुचामन जिलों से रोजाना दो सौ से ज्यादा सैम्पल आते हैं। ऐसे में अब इन मरीजों को दोबारा सेम्पल देने होंगे।
दोबारा देने होंगे सैम्पल
मौजूदा दौर में शुगर, थाइराइड, आर्थेापेडिक बीमारियों के उपचार के लिए हार्मेान्स की जांच होना बेहद जरूरी है। और चििक्त्सक इन बीमारियों की दवा देने से पहले जरूरी थायराइड प्रोफाइल, विटामिन, विटामिन डी, फोलिक एसिड, जीएच, सिरिम फेरेटिन सरीखी कई जांच करवाते है। 48 घंटे तक सैम्पल जांच नहीं होने से खराब हो गए जिससे मरीजों को दोबारा जांच करवाने के लिए दोबारा सैम्पल देने होंगे। मशीन सहित अन्य हार्मोन्स की जांच करवाए बिना इन बीमारियों का उपचार शुरू नहीं किया जा सकता है। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हो रही है जिन्होंने अपना सेम्पल दे दिया है और जांच आने का इंतजार कर रहे हैं।
पेंडिंग दिखा रहा जांच
पिछले दिनों सरकारी अस्पतालों में होने वाली सभी प्रकार की जांच को ऑनलाइन कर दिया गया था। कल्याण अस्पताल की सेंट्रल लैब में जांच रिपोर्ट लेने आने वाले मरीजाें को आईएचएमएस सॉफ्टवेयर पर ये जांच रिपोर्ट पेंडिंग दिखाई रही है। जबकि सैंट्रल लैब में जांच रिपोर्ट लेने के लिए आने वाले मरीजों को मशीन खराब होने के कारण दोबारा सेम्पल देने के लिए कहा जा रहा है। स्टॉफ के अनुसार जांच के लिए कोई भी सेम्पल खराब या डिस्कार्ड होने पर संबंधित वॉयल पर लिखे कोड नम्बर के आधार पर मरीजों को दोबारा सैम्पल देने के लिए सूचना दी जाती है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
इनका कहना है
यह बात सही है कि रीएजेंट खत्म होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है। स्टॉफ ने कंपनी को इसकी सूचना दे दी है। जल्द ही रीएजेंट आ जाएंगे। देरी के कारणों की जांच करवाई जाएगी। डाॅ. महेन्द्र कुमार, अधीक्षक कल्याण अस्पताल