
अजय शर्मा, सीकर.
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद मनरेगा योजना रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। मनरेगा के तहत चल रहे कार्यो व श्रमिकों की संख्या के आधार पर जारी रैकिंग में डूंगरपुर जिला प्रदेश में सबसे आगे है। जबकि सीकर, झुंझुनूं, दौसा व करौली जिले पिछड़े हुए है। वहीं उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का क्षेत्र टोंक जिला 17 वें पायदान पर है। वहीं जोधपुर व झालावाड़ भी टॉप दस में जगह बनाए हुए है। पंचातीयराज विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश की 9690 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत कार्य जारी है। इन कार्यो पर 21 लाख 74 हजार 874 निर्माण श्रमिक कार्यरत है। हालत यह है कि प्रदेश के कई जिलों में जितने जॉब कार्ड बने हुए है उसमें से चौथाई भी काम पर नहीं आ रहे है। इस कारण सभी जिलों में श्रमिकों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है।
204 ग्राम पंचायतों कोई काम नहीं
प्रदेश की 204 ग्राम पंचायतों में कही भी काम नहीं चल रहा है। यहां विभाग की ओर से भी काम शुरू कराने के प्रयास नहीं किए गए। धौलपुर जिले में 171 ग्राम पंचायतों में से 165 ग्राम पंचायतों में जारी है। जबकि करौली जिले में 227 ग्राम पंचायतों में से 187 ग्राम पंचायतों में कार्य जारी है।
काम मांगों अभियान के बाद जागे जिम्मेदार
मनरेगा योजना भाजपा राज में पूरी तरह हासिए पर रही। अब कांग्रेस के आते ही अफसर जागे है। सत्ता परिवर्तन के बाद अफसरों ने निरीक्षण शुरू कर दिए। इस बीच उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने प्रदेशभर में काम मांगो अभियान का ऐलान कर दिया। इसके तहत कोई भी व्यक्ति ग्राम पंचायत में जाकर काम मांग सकता है। शेखावाटी में भी अब निरीक्षण शुरू हो गए।
शिक्षा से बदली स्थिति
प्रदेश में 15 वर्ष पहले मनरेगा योजना श्रमिकों के रोजगार का प्रमुख जरिया बनी थी। लेकिन प्रदेश के ज्यादातर जिलों में शिक्षा का स्तर बढऩे के कारण स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। काम मांगों अभियान का सबसे ज्यादा प्रभाव भी आदिवासी जिलों में ही नजर आ रहा है।