सीकर

ढिलाई ने बढ़ाई शहर की समस्या

परिषद देती है हर साल 13 लाख रुपए का अनुदान रोजाना चोटिल हो रहे हैं लोग
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Aug 03, 2018
sikar
ढिलाई ने बढ़ाई शहर की समस्या

सीकर। जिम्मेदारों की अनदेखी कहें या सरकार की लापरवाही। निराश्रित व बीमार गोवंश की देखरेख के लिए दिया जाना अनुदान के बावजूद शहर के लोग निराश्रित पशुओं की समस्या से जूझ रहे हैं। वजह गोशाला संचालक और नगर परिषद के बीच तालमेल नही होना।इस वर्ष अनुदान नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पशुपालन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि गोशाला बीमार व निराश्रित पशुओं को नहीं ले रही है। नतीजन शहर की प्रत्येक गली में औसतन छह से सात पशु हर समय घूमते रहते हैं। नगर परिषद क्षेत्र में हजारों की संख्या में गोवंश भगवान भरोसे हैं। एसके अस्पताल में भी रोजाना औसतन दो से तीन व्यक्ति गोवंश से घायल मरीज ट्रोमा में उपचार के लिए आते हैं।

आखिर कहां ले जाएं

नगर परिषद क्षेत्र में निराश्रित गोवंश की समस्या से पशुपालन विभाग व गोशाला संचालक जानबूझकर अंजान बना हुआ है। गोवंश के बीमार या घायल होने पर परिषद के कर्मचारी व गोभक्त गोशाला जाते हैं। परिषद कर्मचारियों की माने घायल गोवंश की पशुपालन विभाग में देखरेख नहीं होती है। इंडोर वार्ड होने के बावजूद भर्ती नहीं किया जाता है। इसके अलावा उपचार कराने के बाद जब पशु को लेकर गोशाला जाते हैं तो वहां कर्मचारी दरवाजा तक नहीं खोलते हें। मजबूरन गोवंश को गेट पर छोडकर जाना पड़ता है। ऐसे में गोवंश जीवित रहा या नहीं इसकी निगरानी तक नहीं हो पाती है।

2004 में हुआ अनुबंध

गोपीनाथ गोशाला ट्रस्ट के साथ नगर परिषद को 2004 में अनुबंध हुआ था। अनुबंध के अनुसार नगर परिषद क्षेत्र में सड़कों पर घूमने वाला निराश्रित गोवंश गोशाला में भेजा जा सकता है। इसके लिए परिषद की ओर से पांच लाख रुपए सालाना दिए जाएंगे। इस राशि को बाद में बढ़ाकर 11 लाख रुपए कर दिए गए। अब 13 लाख रुपए कर दिया गया है। ।

इनका कहना है

निराश्रित गोवंश को रखने के लिए परिषद की ओर गोपीनाथ गोशाला को 13 लाख रुपए का अनुदान दिया जाता है। गोवंश की समस्या को दिखवाया जाएगा।

- श्रवण कुमार विश्नोई, आयुक्त नगर परिषद

Published on:
03 Aug 2018 08:39 pm