गांव का यह राजकीय सीनियर विद्यालय अब नए भवन में ही चल रहा है।
दांतारामगढ़. गांव के लोगो ने स्कूल की तस्वीर ही नहीं बल्कि पुराने विद्यालय भवन की जगह चंदे से जमीन खरीदी और उस पर नया भवन ही बनवा दिया। यह जोश व जज्बा है भौंरडोकाबास के ग्रामीणों का। गांव वालो के इस जज्बे करे पंख दिए एक के ही भामाशाह मांगीलाल पाटनी ने उन्होने मुक्त हस्त से दान कर स्कूल का अधिकांश भवन स्वयं ने खड़ा करवा दिया। गांव का यह राजकीय सीनियर विद्यालय अब नए भवन में ही चल रहा है।
काम आया 14 साल पहले ग्रामीणो का निर्णय
गांव में चल रहे माध्यमिक विद्यालय में भविष्य में भवन की चिंता जताई। तो ग्रामीणों ने 2004 में ही विद्यालय के नाम से करीब 13 बीघा जमीन खरीद डाली। और जब छोटा पड़ता दिखाई दिया तो 2013 में ग्रामीणों ने स्कूल की नई जगह पर विद्यालय भवन बनवा दिया। भवन तैयार होते ही ग्रामीणो ने स्कूल को नए भवन में शिफ्ट कर दिया। यहां ग्रामीणों व स्कूल की किस्मत ने जोर खाया और स्कूल नए भवन में आनें के साथ ही माध्यमिक से सीनियर में क्रमोन्नत हो गया।
पाटनी ने दिया पूरा सहयोग
भौंरडोकाबास का राजकीय विद्यालय के लिए जमीन तो ग्रामीणों ने चंदे से खरीद ली लेकिन भवन की समस्या आई तो गांव के ही टीटाबर आसाम प्रवासी मांगीलाल पाटनी आगे हुए और शुरू में उन्होनें दो कमरे बनवाए इसके बाद, तीन कमरे व एक हॉल और फिर दो कमरे करके उनके द्वारा सात कमरे,सीढ़ी व बरामदा बनवाकर दिया गया है। इसके अलावा एक कमरा पेपसिंह बुरडक़ ने व दो कमरें सांसद महादेवसिंह के कोटे से बनवाए गए। हाल की चारदीवारी का निर्माण 13 लाख की लागत से विधायक नारायासिंह के कोटे से करवाया जा रहा है। विद्यालय में पानी के लिए अलग से टयूबवैल भी है।
चंदे से खरीदी जमीन
विद्यालय के 2004 में 13 बीघा जमीन तीन लाख 2500 रूपए में खरीदी गई। इसके लिए किसी ने पाव बीघा, किसी ने आधा बीघा तो किसी ने एक बीघा जमीन के पैसे दिए। इसके बाद 2012 में नरेगा से तीस लाख रूपए में समतलीकरण करवाया गया। विद्यालय में आवागमन के लिए दो रास्तो पर चार-चार लाख की लागत से जिला परिषद व पंचायत समिति से ब्लाक लगवाए गए है।
1922 का स्कूल
ग्रामीण बताते है कि गांव में 1922 का स्कूल है पहले सेठ साहूकारों की संस्था द्वारा विद्यालय संचालित होता था। 1928 में सरकारी विद्यालय हुआ। 1992 में माध्यमिक व 2013 में सीनियर में क्रमोन्न्त हुआ अभी विद्यालय में 294 विद्यार्थी अध्ययनरत है।
खल रही है कमी
विद्यालय में अभी कुछ और कमरों व कार्यालय आदि के लिए भवन की आवश्यकता है। विद्यार्थियों के हिसाब से सुलभ सुविधाओं का अभाव है। छात्राओं की संख्या अधिक है लेकिन उनके लिए अलग से सुविधाए नहीं है। गांव के पूर्व प्रधानाचार्य सुरजाराम मांडिया, पूर्व पंचायत समिति सदस्य प्रभात कुमार मीणा, आदि ने बताया कि विद्यालय की शेष जमीन पर खेल स्टेडियम एवं पार्क विकसित करनें की योजना है।