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Human Angle: घर पीछे छूटा, गायें आगे… सूखे ने 600 KM पैदल चलने को किया मजबूर, जानें जालोर के पशुपालक की कहानी

Human Angle Story: गोवटी रोड पर सैकड़ों गायों के साथ पैदल आगे बढ़ रहे जालोर निवासी बरजाराम से जब पत्रिका टीम ने बात की तो उनकी मजबूरी का दर्द मरे मनों को भी पिघला देने वाला दिखा।

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Feb 23, 2026
गायें और जालोर निवासी बरजाराम. Photo- Patrika

Human Angle Story : थकी- मांदी चाल के साथ सैंकड़ों गायों को हांकते बूढ़े हाथ… दिल में घर छोड़ने का दर्द तो चित्त में चिताओं सी सुलगती चिंताएं। अभाव का भाव भी जर्द चेहरे से साफ झलकता है। ये हालात सूखे की मार से जूझते जालौर के पशुपालकों का है, जो पानी और चारे की कमी की वजह से 600 किलोमीटर दूर हरियाणा की राह पकड़े हुए है।

गोवटी रोड पर सैकड़ों गायों के साथ पैदल आगे बढ़ रहे जालोर निवासी बरजाराम से जब पत्रिका टीम ने बात की तो उनकी मजबूरी का दर्द मरे मनों को भी पिघला देने वाला दिखा।

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उन्होंने बताया कि जालोर में जब भी बारिश कम होती है तो पानी व चारे की समस्या होने पर उन्हें मजबूरी में घर छोड़कर गायों को हरियाणा ले जाना पड़ता है। इसके बाद जब बारिश होती है तो वे फिर पैदल ही गायों को वापस लेकर घर की ओर लौटते हैं।

खराब माली हालत चलाती है ढाई महीने पैदल

बरजाराम ने बताया कि खराब माली हालत के चलते वे गायों को वाहनों से नहीं ले जा सकते। ऐसे में वे उन्हें हांकते हुए पैदल ही ले जाते हैं। बोले, करीब दो महीने पहले 10 लोगों के साथ गायों को साथ लेकर जालौर जिले से रवाना हुए थे।

अब भी उन्हें हरियाणा पहुंचने में करीब 15 दिन का समय और लगेगा। उन्होंने बताया कि उनके इलाके में जब भी बारिश कम होती है तो उन्हें यूं ही पैदल पलायन करना पड़ता है।

दूध बेचकर चलाते हैं आजीविका

हरियाणा में ये पशुपालक पानी और चारे की बेहतर स्थिति वाली जगहों पर अस्थायी डेरा डालकर रहते हैं। आजीविका के लिए वे वहां इन गायों का दूध बेचते हैं।

कठिन सफर व घर छूटने का गम

गाय ले जा रहे पशुपालकों ने बताया कि इस यात्रा में सबसे कठिन लंबा सफर ही होता है। सैकड़ों गायों को संभालते हुए उन्हें पैदल ही चलना होता है। रास्ते में यातायात और मौसम की मार भी झेलनी होती है।

घर छूटने का गम भी साथ चलता है। रास्ते में जहां पानी मिलता है, वहीं कुछ देर आराम और खाना-पीना होता है। कई बार बीमार पशुओं को संभालना और दवा की व्यवस्था करना भी चुनौती बन जाता है।

अस्थिर मानसून से अस्थिर हुआ जीवन

मोतीराम ने बताया कि हर मानसून के साथ वे उम्मीद लेकर गांव लौटते हैं। उन्हें लगता है कि इस बार हालात सुधरेंगे। लेकिन बारिश की अनिश्चितता ने उनके जीवन को भी अस्थिर कर रखा है।

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Updated on:
23 Feb 2026 05:57 pm
Published on:
23 Feb 2026 05:30 pm
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