अरावली पर्वत श्रृखंलाओं में विचरण करने वाले हिसंक वन्य जीवों को काबू में करने के लिए सीकर जिले को अब जयपुर का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा।
सीकर. अरावली पर्वत श्रृखंलाओं में विचरण करने वाले हिसंक वन्य जीवों को काबू में करने के लिए सीकर जिले को अब जयपुर का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। हाल ही में अपने रहवास क्षेत्र से बाहर निकलकर भटके वन्य जीव पैंथर को काबू में करने के लिए वन विभाग को जयपुर से वाइल्ड लाइफ की टीम को बुलाना पड़ा। पत्रिका में पैंथर को काबू में करने के लिए जयपुर से टीम बुलाने और जिले में होने वाली समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। इसे वन विभाग के मुख्यालय ने गंभीरता से लिया और सीकर जिले में वन्यजीवों की आमद को देखते हुए ट्रेंक्यूलाइजिंग गन की व्यवस्था को हरी झंडी दिखा दी है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही सीकर जिले को खुद की नई ट्रेंक्यूलाइजिंग गन मिल जाएगी। इससे आस-पास के जिलों के लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। गौरतलब है कि फिलहाल वन विभाग के जयपुर, जोधपुर, उदयपुर व कोटा कार्यालयों में ही ट्रेंक्यूलाइजिंग गन उपलब्ध है
४ सदस्यीय टीम बनाई
ट्रेंक्यूलाइजिंग गन के साथ हेलमेट, सुरक्षा कवच सहित अन्य जरूरी उपकरणों की व्यवस्था के निर्देश मिल गए हैं। इसके लिए रेंज स्तर पर चार सदस्यों की टीम बनाई गई है। विभाग का दावा है वन्य जीव के आबादी क्षेत्र में घुसने की सूचना पर तुरंत ही यह टीम मौके पर जाएगी।
देंगे प्रशिक्षण
ट्रेंक्यूलाइजिंग गन का उपयोग भी विशेषज्ञ ही कर सकते हैं। वन्य प्राणियों को अचेत करने के लिए उनके शारीरिक वजन के हिसाब से दवा की मात्रा निर्धारित की जाती है। एेसे में जिला स्तर पर कर्मचारियों को इसके लिए प्रशिक्षित
किया जाएगा।
& जिला स्तर पर प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा गया। जहां सीकर जिले के लिए ट्रेक्यूलाइजिंग गन उपलब्ध कराने की हामी भरी गई है। जल्द ही सीकर रेंज को यह गन मिल जाएगी। फिलहाल जिला स्तर पर क्विक रेस्पोंस टीम बना दी है। जिससे जयपुर से आनी वाली टीम का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
विजयशंकर, पांडे, उपवन संरक्षक सीकर