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World Blood Donor Day: एक मौत ने बदल दी दिशा, 51 साल की उम्र तक 164 बार रक्तदान कर बचाई कई जिंदगी

World Blood Donor Day 2026: कभी आपदा के मौके पर अपने परिचितों के लिए रक्त की एक-एक यूनिट के लिए लोगों से गुहार लगाने वाले सीकर निवासी एक रक्तदाता की पहल युवाओं को समाजसेवा की नई राहें दिखा रही है।

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सीकर

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Anil Prajapat

Jun 14, 2026

BL Meal

अपनी बेटियों के साथ बीएल मील। फोटो: पत्रिका

सीकर। कभी आपदा के मौके पर अपने परिचितों के लिए रक्त की एक-एक यूनिट के लिए लोगों से गुहार लगाने वाले सीकर निवासी एक रक्तदाता की पहल युवाओं को समाजसेवा की नई राहें दिखा रही है। सीकर निवासी रक्तदाता बीएल मील 51 साल की आयु में 164 बार यूनिट रक्तदान कर चुके है। खास बात यह है कि उनकी पहल के बाद शेखावाटी में रक्तदान करने वाले युवाओं की फौज तैयार हो गई है। लगभग 30 साल में उन्होंने पांच हजार रक्तदाता तैयार किए है। इनमें से 55 रक्तवीर 50 बार से ज्यादा और 400 रक्तवीर 20 बार से ज्यादा रक्तदान कर चुके हैं। 1000 से ज्यादा 'लाइव डोनर' देर रात भी कॉल आने पर ब्लड बैंक पहुंच जाते हैं।

सीकर जिले के मूलत: कोलिड़ा निवासी एडवोकेट बीएल मील ने 20 साल की उम्र में सबसे पहले रक्तदान किया था। रक्तदान के यज्ञ में एडवोकेट मील का पूरा परिवार भी साथ निभाता है। मील की पत्नी सावित्री मील भी नियमित रक्तदान कर रही है। वहीं एमबीबीएस कर रही बेटी डिंपल चौधरी 16 बार और छोटी बेटी दीपिका चौधरी 3 बार, भाई रघुवीर 47 बार, बनवारीलाल 10 बार और भतीजे मोहित मील-अंशु मील 11 बार रक्तदान कर चुके हैं।

एक मौत ने बदल दी जिंदगी की दिशा

पत्रिका से बातचीत में मील ने बताया कि बात लगभग 1993 की है, मेरे सामने सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की सिर्फ समय पर रक्त नहीं मिलने की वजह से मौत हो गई। वही पीड़ा मेरे लिए संकल्प बन गई। उसी दिन ठान लिया कि अब किसी की जान खून की कमी से नहीं जाने दूंगा। इसके बाद उन्होंने रक्तदान की पूरी प्रक्रिया समझी और अभियान शुरू कर दिया।

जागरूकता के दम पर तोड़े मिथक

शुरुआत में लोग कई तरह की भ्रांतियों की वजह से रक्तदान के लिए राजी नहीं होते थे, लेकिन मील ने हार नहीं मानी। दोस्तों की टीम बनाकर युवाओं को मोटिवेट किया। अब तक उनकी पहल के बाद 700 से ज्यादा रक्तदान शिविरों का आयोजन हो चुका है। इन शिविरों में दो लाख यूनिट से ज्यादा रक्त संग्रहित हो चुका है। वहीं आपाताकालीन स्थितियों में बीमारों को लगभग एक लाख यूनिट रक्त दिलवा चुके है।

कोरोना काल में बनाया सेवा का रेकॉर्ड

कोरोनाकाल में रक्तदान शिविर के आयोजन नहीं होने पर मील ने समाज सेवा की नई मुहिम शुरू की। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया व पूर्व विधायक नंदकिशाो महरिया की पहल पर लगभग 118 दिन प्रवासी श्रमिकों को राहत बांटी। इसके अलावा कोरोनाकाल कई गंभीर मरीजों के लिए टीम सदस्यों को दूसरे शहरों में भी भेजा।

अब देहदान के लिए लोगों को कर रहे प्रोत्साहित

वर्ष 2023 में अंगदान पखवाड़े के समापन पर सामाजिक कार्यकर्ता बीएल मील ने महज 1 घंटे में 132 लोगों को प्रेरित कर उनसे से देहदान की घोषणा करवाकर अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। इनमें से 4 लोगों का मरणोपरांत मेडिकल कॉलेज में देहदान कराया भी जा चुका है। रक्तदान के क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए मील को नौ बार रेड एंड व्हाइट बहादुरी अवार्ड, 1 लाख का परिवार कल्याण पुरस्कार, 25 हजार का सर्वश्रेष्ठ युवा पुरस्कार मिल चुका है।