
...now the cycle has been made a ride
-पेट्रोल- डीजल की कीमतों के खिलाफ साइकिल पर उतरी कांग्रेस
- आक्रोश जताने के लिए तरह तरह से निकाले तरीके
सीकर. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस विभिन्न तरह से आक्रोश जताने में जुटी हुई है। पहले घोड़ा-गाड़ी फिर ऊंट गाड़ी तो अब तो साइकिल की सवारी से विरोध जताया जा रहा है।
पेट्रोल व डीजल की कीमतों सहित महंगाई बढऩे के विरोध में कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को फिर शहर में प्रदर्शन किया। प्रदेशव्यापी आह्वान पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष पीएस जाट की अगुआई में साइकिल रैली निकाली। जो जाट बाजार से सूरजपोल गेट, सिटी डिस्पेन्सरी नम्बर दो, बजरंग कांटा तथा सिल्वर जुबली रोड होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। इस दौरान महंगाई व सरकार विरोधी नारे लिखी तख्तियों के साथ कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष जाट ने बताया कि देश में बढ़ती महंगाई के खिलाफ कांग्रेस के सात से 17 जुलाई तक जारी 10 दिवसीय आंदोलन किया जा रहा है। जिसके तहत साईकिल रैली निकालकर केंद्र सरकार को संदेश दिया गया है कि पेट्रोल व डीजल की बढ़ी दरों की वजह से वाहन चलाना मुनासिब नहीं रह गया है। ऐसे में आमजन को साईकिल ही चलानी होगी। उन्होंने मांग की कि पेट्रोल व डीजल को केंद्र सरकार को जीएसटी में शामिल कर देना चाहिए। जिससे इनकी कीमतों में कमी के साथ केंद्र व राज्य सरकार का विवाद भी हल हो जाएगा।
सेवादल करेगा सद्बुद्धि यज्ञ
इधर, महंगाई के खिलाफ भीख मांगने वाले प्रदर्शन पर सांसद सुमेधानंद सरस्वती के बयान के खिलाफ जिला कांग्रेस सेवादल ने भी मोर्चा खोल दिया है। सेवादल ने सांसद के बयान की निंदा करते हुए सद्बुद्धि यज्ञ का फैसला लिया है। जो शनिवार को किया जाएगा। सेवादल जिलाध्यक्ष नरेन्द्र बाटड़ ने बताया की देश में बढती मंहगाई के लिए केंद्र की मोदी सरकार जिम्मेदार है। उससे राहत दिलाने की बजाय सांसद अनर्गल बयान दे रहे हैं। जिसे लेकर शनिवार को कलेक्ट्रेट के सामने सद्बुद्धि यज्ञ किया जाएगा। गौरतलब है कि महंगाई के विरोध में कांग्रेस सेवादल ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर भीख मांगने का प्रदर्शन करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया था। जिस पर सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने अगले दिन प्रेस वार्ता में टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को घेरा था। सांसद ने कहा था कि मुख्यमंत्री खुद तो बाहर नहीं निकलते और कार्यकर्ताओं को कटोरा देकर या अन्य आंदोलनों के लिए उकसाते रहते हैं।