सीकर

मशीन खराब है, बाद में आना

एसके अस्पताल और जनाना अस्पताल में नहीं करते सोनोग्राफी
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Dec 15, 2018
sikar sk hospital news
मशीन खराब है, बाद में आना


रोजाना 35 हजार खर्च करने की मजबूरी
सीकर. सोनोग्राफी करवानी है तो निजी अस्पतालों में जाएं सरकारी अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन खराब है. यह सुनकर इलाज के लिए अस्पताल में आए मरीजों की आस टूट रही है। मरीजों का दुर्भाग्य कहें या सरकारी अनदेखी। एसके अस्पताल और सरकारी जनाना अस्पताल में करीब एक माह से ओपीडी में आने वाले मरीजों की सोनोग्राफी नहीं हो रही है। इधर अस्पताल प्रबंधन भी सोनोलॉजिस्ट नहीं होने या मशीन खराब होने के हवाला देकर मरीजों को टरका रहा है। खास बात यह है कि अस्पताल स्टॉफ भी सोनोग्राफी के लिए आने वाले मरीजों के पंजीयन तक नहीं कर रहा है।
रोजाना 35 हजार की सोनोग्राफी
एसके अस्पताल और जनाना अस्पताल के आउटडोर आंकड़ों को देखा जाए तो करीब तीन सौ मरीज जिनमें प्रसूताएं शामिल है। उनकी सोनोग्राफी के लिए चिकित्सक पर्ची बनाते हैं। निजी लैब में सोनोग्राफी 250 रुपए में सोनोग्राफी की जाती है। मरीजों को रोजाना औसतन 35 हजार रुपए से ज्यादा निजी लैब में देने पड़ रहे हैं।
यह है कारण
कल्याण अस्पताल में एक कलर और एक ब्लैक एंड व्हाइट सोनोग्राफी मशीन है। इनमें से कलर डॉप्लर मशीन का एक्टिव ट्रेकर के पूरा भरने के कारण मशीन को बंद करना पड़ा। ब्लैक एंड व्हाइट मशीन ठीक है। ब्लैक एंड व्हाइट मशीन पुरानी और कम क्षमता की होने के कारण केवल इंडोर के मरीजों की ही सोनोग्राफी होती है। इधर जनाना अस्पताल में कलर डॉप्लर मशीन तो है लेकिन चिकित्सक नहीं है। रही सही कसर चिकित्सकों के अवकाश पर जाने से हो जाती है।
एक्टिव टे्रकर भर जाने के कारण कलर डॉप्लर मशीन से सोनोग्राफी नहीं की जा रही है। ब्लैक एंड व्हाइट मशीन से केवल इमरजेंसी मरीजों की सोनोग्राफी की जा रही है।
हरिसिंह, पीएमओ एसके अस्पताल सीकर
चिकित्सक के अवकाश पर जाने के कारण कलर डॉप्लर मशीन से सोनोग्राफी नहीं हो रही है। मरीजों को एसके अस्पताल भेजा जाता है।
डॉ. बीएल राड़, प्रभारी, जनाना अस्पताल सीकर

Published on:
15 Dec 2018 06:04 pm