अब पुलिस विभाग ने पदों में बढ़ोतरी कर दोबारा आवेदन भी ले लिए। लेकिन धरातल पर भर्ती परीक्षा की तैयारी नाकाफी नजर आ रही है।
सीकर.
प्रदेश के 15 लाख युवाओं को सरकारी लापरवाही के सुधरने का इंतजार है। पुलिस विभाग ने इसी साल कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को ऑनलाइन कराने का दावा किया था। लेकिन पेपर लीक मामले ने सरकारी इंतजामों की पोल खोल दी। अब पुलिस विभाग ने पदों में बढ़ोतरी कर दोबारा आवेदन भी ले लिए। लेकिन धरातल पर भर्ती परीक्षा की तैयारी नाकाफी नजर आ रही है। अब भर्ती में ज्यादा देरी युवाओं के नौकरी के अरमानों पर भारी पड़ सकती है। क्योंकि चुनावी साल में आचार संहिता की तलवार लटने पर नौकरी की राह दूर हो सकती है। ज्यादातर युवाओं का कहना है कि सरकार को जल्द भर्ती परीक्षा करानी होगी। हालांकि पुलिस विभाग द्वारा जुलाई महीने में ही परीक्षा कराने का दावा भी किया जा रहा है। इससे अभ्यर्थी भी परेशान है।
4 साल इंतजार फिर भी कुछ पता नहीं
पुलिस कांस्टेबल की भर्ती में जुटे प्रदेश के युवाओं को चार वर्ष तक भर्ती का इंतजार करना पड़ा। इसके बाद भी अभी तो भर्ती प्रक्रिया जारी है। ऐसे में नियुक्ति को लेकर भी संशय है।
सेंटर तलाशना भी बड़ी चुनौती
पुलिस भर्ती में लगभग 15 लाख से ज्यादा आवेदन है। जुलाई व अगस्त महीने में कई विभागों की ऑफलान परीक्षाएं होनी है। ऐसे में पुलिस विभाग को ऑफलाइन परीक्षा कराने के लिए सेंटर तलाशना भी बड़ी चुनौती रहेगी। सूत्रों का परिणाम सितम्बर तक आने पर ही बेरोजगारों का नौकरी का सपना पूरा हो सकता है।
एक्सपर्ट व्यू : बिना तैयारी के परीक्षा का सपना
एक्सपर्ट बीएल रैवाड़ का कहना है कि सरकार बिना किसी तैयारी के लिए परीक्षा कराने पर तुली है। इसी कारण प्रश्न पत्र आऊट सहित अन्य मामले सामने आते है। सरकार ने बिना किसी जांच के निजी एजेन्सी को ऑनलाइन परीक्षा कराने का जिम्मा दे दिया। इस कारण कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को रद्द करना पड़ा। अब ऑफलाइन परीक्षा कराने का दावा किया जा रहा है।