सीकर

Rajasthan ka Ran : रसीदपुरा में प्याज मंडी तो बनवा दी, शुरू कब होगी पता नहीं

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Oct 18, 2018
Rajasthan assembly election Ground report from rasidpura sikar
Rajasthan assembly election Ground report from rasidpura sikar

अजय शर्मा की रिपोर्ट
सीकर. फतेहपुर रोड से धोद विधानसभा क्षेत्र में जाने के लिए टूटी सडक़ पर सफर शुरू होता है। शहर से तीन किलोमीटर दूर जाते ही स्थिति बदलनी शुरू हो जाती है। फतेहपुर रोड पर जिस किसी से भी बात करो वह टूटी सडक़ की तरफ इशारा कर विकास गिनाता है। थोड़ा आगे चलते है तो सडक़ सूनी और खेतों में फसलों की कटाई में जुटे किसान नजर आते हैं।

भढाडर तिराहे के पास खड़े सुरेश सिंह बताते हैं कि सरकार ने एसके कॉलेज के टुकड़े कर अच्छा किया लेकिन पूरे संसाधन कब मिलेंगे किसी को पता नहीं। इसके बाद बाइक के जरिए अगले पड़ाव के लिए भढाडर बस स्टैण्ड पहुंचते हैं।
यहां किसान पहले से चुनावी चर्चा में मशगूल हैं, किसान कहते हैं कि सरकार को किसानों की इतनी चिन्ता थी तो बिजली पर छूट पहले क्यों नहीं दी। इसके बाद पिछले 40 वर्षों मेंं धोद की सियासत में सक्रिय रहे नेताओं की कहानी सुनाने में वह मशगूल हो जाते हैं।


इलाके की कई ढाणियों के लोगों से मुलाकात करते हुए हम प्याज मंडी पहुंच जाते हैं। यहां किसानों के प्याज की जगह कचरे के ढेर लगे हुए है। मंडी में बैठे कुछ मजदूर ग्रामीण क्षेत्र के चिकित्सा व्यवस्था को कोसते रहे। यहां गांव की चौपाल पर हनुमान थालौड़, जगदीश शर्मा, रामदेवाराम, रामचंद, गणेशाराम, हरफूलसिंह, सरवर खान, श्रीराम शर्मा, दाउद खान, आमीन खान, मुकन्दाराम, दंताधर, बालूराम मील व राजेश बैठे हुए हैं। सरकार और चुनाव का नाम लेते ही आधे से ज्यादा के चेहरे गुस्से से भर जाते हैं।

खेल छोडकऱ कहते हैं कि क्या हुआ, हमारे गांव तो आज भी पानी में डूब जाता है। इस बीच युवा राजेश धोद कहते हैं कि सबसे ज्यादा सडक़ अभी बनी है। पानी निकासी जैसी समस्या तो हर गांव की कहानी है। गांव के राजकीय स्कूल के सामने बैठे कुछ लोग कहते हैं कि हमने सभी को देखा है कि लेकिन कोई भी धोद की समस्याओं को खत्म नहीं कर सका। ग्रामीणों का कहना है कि धोद भौगोलिक तौर पर तीन भागों में सीकर से जुड़ा है, लेकिन कोई भी सरकार भला नहीं कर सकी।


हर चौपाल पर दो मुद्दे
इलाके के कई गांव-ढाणियों का सफर कर लोसल पहुंचे। यहां की चौपालों पर सबसे ज्यादा चर्चा किसानों के मुद्दे और बेरोजगारी को लेकर है। गांव के युवा विनय बताते है कि सीकर के साथ धोद भी शिक्षा में आगे हैं। यहां के युवा राजनीति में फंसने की बजाय भर्तियों से सोच बनाते है। सरकार ने सवा चार साल पूरे होने के बाद भर्ती शुरू की।

धोद की पहचान
अरावली पर्वत माला की दूसरी बड़ी चोटी हर्ष धोद विधानसभा क्षेत्र में है। हर्ष पर्वत पर रोप-वे के जरिए खूब सपने दिखाए। लेकिन धरातल पर टूटी सडक़ है, इस कारण पर्यटकों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। लोगों का कहना है कि यदि हर्ष पर्वत को पर्यटन के हिसाब से डवलप किया जाए तो धोद क्षेत्र के काफी परिवारों को रोजगार मिल सकता है।

Published on:
18 Oct 2018 11:50 am