
Rajasthan PM Shri School: सीकर: राजस्थान की राजकीय पीएमश्री स्कूलों में संविदा पर नियुक्त एनटीटी शिक्षकों के मानदेय को लेकर बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। राज्य सरकार ने एनटीटी शिक्षकों का मानदेय 11 हजार रुपए तय कर रखा है, इसके बावजूद प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त इन शिक्षकों को अलग-अलग जिलों में समान अवधि और समान कार्य के बावजूद 3200 से 6200 रुपए तक मानदेय दिया जा रहा है। वहीं, इनके साथ नियुक्त सफाईकर्मियों को भी तय 6 हजार रुपए के बजाय करीब आधा मानदेय ही मिल रहा है।
मामले में जिला समसा विभाग का कहना है कि स्कूलों में कर्मचारियों से चार घंटे ही कार्य करवाने की वजह से मानदेय में नियमानुसार 50 फीसदी तक की कटौती की जा रही है। पर भर्ती की विज्ञप्ति में घोषित मानदेय से आधा और उस पर भी चार घंटे की समान अवधि की सेवाएं लेने के बावजूद अलग-अलग जिलों में शिक्षकों व सफाईकर्मियों के मानदेय में अंतर से प्लेसमेंट एजेंसी से लेकर शिक्षा विभाग तक की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह और सवाल गहरा गए हैं।
एनटीटी शिक्षक व सफाईकर्मी प्रदेश में 629 पीएमश्री स्कूलों में नियुक्त हैं। नई शिक्षा नीति के तहत इन स्कूलों में पिछले सत्र से बालवाटिकाओं का संचालन शुरू करने पर इन कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी। 10 महीने के लिए हुई नियुक्ति में पिछले सत्र में भी इनके मानदेय को लेकर गफलत रही। लेकिन, इस बार ये कर्मचारी शिक्षा विभाग के खिलाफ मुखर हो गए हैं।
पत्रिका की पड़ताल में सामने आया है कि बारां जिले में एनटीटी शिक्षक को ईपीएफ कटौती के बाद 3200 रुपए, तो सीकर में 3900 रुपए मानदेय मिल रहा है। इसी तरह चूरू में 6200 रुपए, तो झुंझुनूं में 8034 रुपए मानदेय दिया जा रहा है। जबकि पूरे प्रदेश में शिक्षकों की योग्यता, कार्य अवधि और कार्यभार समान है। इसी तरह सफाईकर्मियों में भी सीकर में 3100 रुपए, तो झुंझुनूं जिले में 3705 रुपए मानदेय मिलना सामने आया है।
कम वेतन मिलने पर एनटीटी शिक्षकों व सफाईकर्मियों ने प्लेसमेंट एजेंसियों व शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलना भी शुरू कर दिया है। अलग-अलग जिलों के शिक्षक व सफाईकर्मी राज्य स्कूल शिक्षा परिषद के परियोजना निदेशक को इस संबंध में लिखित शिकायत दे रहे हैं।
पीएमश्री स्कूलों के एनटीटी शिक्षकों व सफाईकर्मियों की नियुक्ति संबंधी विज्ञप्ति व पत्रों में उनका मानदेय 11 व 6 हजार रुपए ही दर्ज किया गया है। उसके आधार पर ही अभ्यर्थी इन पदों के लिए आवेदन करते हैं। फिर घंटों की शर्त थोपकर उनके मानदेय में कटौती क्यों की जा रही है? पूरे प्रदेश में जब इन दोनों कर्मचारियों से चार-चार घंटे ही कार्य करवाया जा रहा है, तो अलग-अलग जिलों में इनके मानदेय में अंतर क्यों आ रहा है? शिक्षा विभाग के अधिकारियों व प्लेसमेंट एजेंसी की मिलीभगत से तो मानदेय का कोई खेल नहीं हो रहा?
बच्चों की नींव तैयार करने वाले शिक्षकों व सफाईकर्मियों की वेतन विसंगति को लेकर संगठन के पास भी शिकायतें आई हैं। विभाग को इसकी जांच कर कर्मचारियों को पूरा मानदेय दिलाना सुनिश्चित करना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो संगठन उनके हक के लिए आंदोलन करेगा।
-उपेंद्र शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ
जिले में शिक्षा विभाग के नियमानुसार ही एनटीटी शिक्षकों व सफाईकर्मियों को मानदेय दिया जा रहा है। यदि अन्य जिलों में ज्यादा मिल रहा है तो इस संबंध में उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
-प्रमोद महला, एपीसी, समसा, सीकर