
सीकर. रीट द्वितीय लेवल गणित-विज्ञान के मामले में न्यायालय का निर्णय कभी भी आ सकता है। इस मामले में दो वर्ष से चयनित बेरोजगारों का नौकरी का इंतजार बढ़ता जा रहा है। इस मामले में पिछले दिनों न्यायालय में सुनवाई पूरी हो गई थी। लेकिन न्यायालय ने निर्णय को सुरक्षित रख लिया था। सूत्रों का कहना है कि शीतकालीन अवकाश से पहले गणित-विज्ञान मामले में कभी भी निर्णय सुनाया जा सकता है। दूसरी तरफ रीट प्रथम लेवल के मामले में तीन दिसम्बर को सुनवाई हुई थी। अब न्यायालय ने नौ जनवरी की सुनवाई की तिथि तय की है। ऐसे में 26 हजार चयनित बेरोजगारों को नौ जनवरी की सुनवाई का इंतजार है।
चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा मुद्दा
विधानसभा चुनाव के दौरान हुई चुनावी सभाओं में रीट का मामला सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहा था। भाजपा ने जहां एक पत्र का हवाला देकर रीट चयनितों की नौकरी में रोड़ा अटकाने के आरोप लगाए थे। वहीं कांग्रेस ने सत्ता में आते ही रीट प्रथम व द्वितीय लेवल के मामले में न्यायालयों में लंबित मामलों को निपटाकर नियुक्ति देने की बात कही थी।
पूरा सत्र शिक्षकों के इंतजार में गुजरा
राज्य सरकार ने फरवरी महीने में रीट के जरि भर्ती की कवायद शुरू की थी। ऐसे में उम्मीद थी कि जुलाई महीने तक प्रदेश के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को शिक्षक मिल जाएंगे। लेकिन न्यायालय में मामला अटकने के कारण विद्यार्थियों के अरमानों पर पानी फिर गए।
बेरोजगार परेशान
राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव का कहना है कि प्रदेश का बेरोजगार काफी परेशान है। इसलिए कांग्रेस सरकार को लोकसभा चुनाव से पहले तक रीट सहित अन्य भर्तियों के मामलों का निपटारा कर राहत देनी होगी। सरकार गठन के बाद जल्द मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री से सभी मसलों को लेकर चर्चा भी की जाएगी।
एक शिक्षक भर्ती पूरी नहीं कर सकी भाजपा
पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती बड़ा मुद्दा रही। इस दौरान भाजपा ने एक ही परीक्षा के जरिए थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती कराने की बात कही थी। पांच साल में भाजपा एक भी शिक्षक भर्ती पूरी नहीं करा सकी। बेरोजगारों का कहना है कि सरकार को पुराने भती विज्ञप्ति के अनुसार ही पूरी करानी चाहिए। हालांकि कांग्रेस नेता खुद भी रीट की अटकी भर्ती को जल्द न्यायालय से हरी झंडी दिलाने की बात कह चुके है। आचार संहिता हटने के बाद बेरोजगारों को आस बंधी है।