
सीकर. सरकार पुरानी गलतियों से भी सबक नहीं ले रही है। इसका खामियाजा प्रदेश के नर्सिंग बेरोजगारों को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि सरकार ने द्वितीय श्रेणी नर्सिंग भर्ती परीक्षा के बजाय सीधे अंकों के आधार पर कराने के फरमान जारी किए है। इस कारण के प्रदेश के ज्यादातर नर्सिंग विद्यार्थियों में आक्रोश है। बेरोजगारों का कहना कि नर्सिंग भर्ती में बोनस अंक होने के कारण नए युवाओं को मौका नहीं मिलेगा। खास बात यह है कि जिन सीधी भर्तियों का भाजपा ने सबसे ज्यादा विरोध किया वही अब इन भर्तियों के जरिए युवाओं को नौकरी के सब्जबाग दिखा रही है।
पिछली सरकार के समय अटकी छह भर्ती
पिछली कांग्रेस सरकार ने विद्यार्थी मित्र, नरेगा संविदा कर्मी सहित को नियमित करने के लिए सीधी भर्ती का फॉर्मूला लेकर आई थी। इसके बाद सरकार ने सभी विभागों में सीधी भर्ती के जरिए पदों को भरने के लिए विज्ञप्ति जारी की। पिछली सरकार के समय पंचायतीराज, शिक्षा, चिकित्सा, विद्युत निगम सहित अन्य विभागों की छह भर्ती अटक गई। इनमें चयनित बेरोजगारों को अभी तक नौकरी का इंतजार है।
पहले खुद विरोध में, अब दे रहे हैं बढ़ावासुराज संकल्प यात्रा के दौरान भाजपा ने सीधी भर्तियों का खुलकर विरोध किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने सत्ता में आते ही सीधी भर्तियों के पेंच सुलझाकर भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए ही भर्ती कराने की बात कही थी। लेकिन अब भाजपा सरकार सुराज संकल्प यात्रा की घोषणाओं पर अमल नहीं कर रही है।
युवाओं में इसलिए आक्रोश
युवाओं का कहना है कि सरकार की विभिन्न परियोजनाओं में कार्यरत कार्मिकों को नर्सिंग में दस से 30 अंक बोनस के दिए जाएंगे। जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे अभ्यर्थियों को यह बोनस अंक नहीं मिलेंगे। ऐसे में उनका नौकरी का सपना टूटता जा रहा है।
इनका कहना है
-सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। सरकार को नर्सिंग के क्षेत्र में भर्ती परीक्षा कराकर ही आयोजित करनी चाहिए। इससे नर्सिंग क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलेगा। राजस्थान में काफी पद रिक्त है। सरकार को संविदा कार्मिकों के लिए भले ही सीधी भर्ती कराए। लेकिन नए युवाओं को मौका परीक्षा के जरिए ही मिलना चाहिए।
विशाल शर्मा, प्रदेश महासचिव, राजस्थान स्टूडेंट नर्सेज एसोसिएशन