सीकर

Sikar election update : हर बार झोली भरके देते हैं वोट, फिर भी नहीं हो रहा इन समस्याओं का समाधान

www.patrika.com/sikar-news/
3 min read
Nov 26, 2018
Sikar district basic problems
Sikar district basic problems

सीकर.
सीकर के चुनावी रण ( Rajasthan Election 2018 ) में कही प्रत्याशी बदलने के साथ चुपके से मुद्दे बदल गए है। वहीं कई विधानसभा क्षेत्रों में बर्षो बाद भी वही पुराने चुनावी मुद्दे है। जिले की आठों विधानसभा क्षेत्रों का अब भी सबसे बड़ा मुद्दा पेयजल ही है। दूसरे बड़े मुद्दे की बात करें तो मेडिकल कॉलेज, शेखावाटी विवि और संभाग मुख्यालय है। वहीं हर विधानसभा के अपने स्थानीय मुद्दे भी है। जिले के सियासी रण में राष्ट्रीय व राज्य स्तर के अलावा स्थानीय मुद्दे ही छाए हुए है।


सीकर: कभी पुलिया बड़ा मुद्दा, अब पानी निकासी

सीकर विधानसभा क्षेत्र में भी मुद्दे लगातार बदलते रहे है। कभी यहां रेलवे फाटक पर पुलिया निर्माण बड़ा मुद्दा था। लेकिन इसका निर्माण होने के बाद अब मुद्दे का स्वरूप बदलता गया है। हालांकि अब जनता की रेलवे पुलिया को फोरलेन करने की मांग है। इसके अलावा पहले जहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विवि की स्थापना की मांग होती थी, अब विवि खुल गया। ऐसे में मुद्दा विवि का भवन और स्टाफ है। इसके अलावा शेखावाटी संभाग, पानी निकासी, हर्ष पर्वत रोपवे, स्मृति वन व मेडिकल कॉलेज सहित अन्य मांग है।

धोद: पहले बिजली और सडक़, अब प्याज मंडी और कॉलेज


वर्षो तक यहां पानी, बिजली और सडक़ ही प्रमुख मुद्दे थे। लेकिन बदले दौर में अब यहां के प्रमुख मुद्दे प्याज मंडी और सरकारी कॉलेज हो गए है। खास बात यह है कि धोद क्षेत्र के सभी दलों के प्रत्याशी इस चुनाव में प्याज मंडी और सरकारी कॉलेज के मुद्दे को लेकर जनता के बीच जा रहे है।


फतेहपुर: पर्यटन का सपना अधूरा, अब नए मुद्दे

फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में किसी दौर में पर्यटन नगरी का मुद्दा का गरमाया था, लेकिन जनप्रतिनिधि इस सपने को पूरा नहीं कर सके। ऐसे में अब पानी निकासी, सरकारी कॉलेज सहित अन्य स्थानीय मुद्दे ही गर्माए हुए है।


लक्ष्मणगढ़: सरकारी कॉलेज और आवारा पशु

इलाके में पहले सडक़, पानी-बिजली ही बड़े मुद्दे थे। लेकिन वक्त के साथ यह मुद्दे खत्म होते गए। विधानसभा चुनाव 2018 के रण में सरकारी कॉलेज और आवारा पशु बड़े मुद्दे बने हुए है। इसके अलावा स्थानीय मुद्दों में पानी निकासी, अस्पताल और स्कूलों में स्टाफ की नियुक्ति की मांग काफी उठ रही है।


दांता, श्रीमाधोपुर और खंडेला में पानी का ही मुद्दा

जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों में अभी भी यमुना से पानी लाने की योजना ही बड़ा मुद्दा है। इन विधानसभा क्षेत्रों के कई गांव-ढाणियों में तो पेयजल की आस टैंकर सप्लाई पर टिकी है।


नीमकाथाना: जिला बनाने के मुद्दे की गूंज

नीमकाथाना में भले ही प्रत्याशियों के चेहरे बदल गए हो, लेकिन मुद्दे वही है। यहां इस चुनाव में भी नीमकाथाना को जिला बनाने की मांग उठ रही है। वहीं सडक़ और अस्पताल में सुविधा बढ़ाने को लेकर भी प्रत्याशी दावे-वादे कर रहे है। पिछले चार विधानसभा चुनावों में यही मुद्दे रहे। हालांकि पुलिया व पानी के प्रोजेक्टों की गूंज इस चुनाव में थोड़ी कमजोर हुई है।


महावीर पुरोहित ने बताया कि 1957 के चुनाव में लादूराम जोशी कांग्रेस से मैदान में तो जगदीश प्रसाद माथुर जनसंघ से उतरे थे। इस चुनाव में गरिमामय तरीके से चुनाव प्रचार होता था। इन चुनावों में सीकर का कोई खास मुद्दा नहीं था। फिर भी प्रत्याशी अपने हिसाब से पानी, बिजली, सडक़, नाली व बस-ट्रेन की सुविधाओं को लेकर ही बात होती थी।

पूर्व सभापति सोमनाथ त्रिहण का कहना है कि उस दौर की राजनीति में हल्कापन नहीं था। उस दौर में कॉनर्र बैठकों के जरिए ही स्थानीय गली-मोहल्लों के वादे प्रत्याशी किया करते थे। उस दौर में प्रत्याशी कॉलोनियों की समस्याओं को मुद्दा बनाते थे। राष्ट्रीय व राज्यस्तर के मुद्दों की गूंज काफी कम ही रहती थी।


भाजपा के पवन मोदी का कहना है कि चुनावों के दौरान शेखावाटी में मुद्दे बदलते रहते है। किसी जमाने में बॉडग्रेज को लेकर ही लोकसभा व विधानसभा के चुनाव लड़े गए। लेकिन यह मुद्दा विधानसभा चुनावों में नहीं गूंजता है। लोकसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा स्वभाविक तौर पर गर्मा जाता है।

Updated on:
26 Nov 2018 11:48 am
Published on:
26 Nov 2018 11:48 am