
सीकर। शिक्षानगरी के मास्टर प्लान पर विवादों के बाद ही मुहर लग रही है। शिक्षानगरी के 2013 के मास्टर प्लान का प्रारूप जारी होने के दौरान भी किसानों ने काफी सवाल उठाए थे। इसके बाद आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम रुप से जारी मास्टर प्लान में दासा की ढाणी में प्रस्तावित रीको को दूसरे जोन में शिफ्ट किया गया था। अब 2047 के मास्टर प्लान पर अंतिम मुहर लगने से पहले ही विवाद शुरू हो गया। विवाद की शुरूआत प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद विधानसभा में उठे मामले से हुई थी।
विधानसभा में कांग्रेस अध्यक्ष व लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविन्द सिंह डोटासरा ने सीकर के मास्टर प्लान का प्रारूप जारी नहीं होने का मामला उठाया था। इस दौरान यूडीएच मंत्री ने कांग्रेस राज में तैयार हुए मास्टर प्लान पर सवाल उठाते हुए कई जनप्रतिनिधि व अधिकारियों की मिलीभगत से गड़बड़ी होने की बात कही थी।
मास्टर प्लान का प्रारूप जारी होने के बाद किसानों ने सुविधा क्षेत्र में जमीन शामिल होने पर सबसे ज्यादा आपत्ति दर्ज कराई थी। सुविधा क्षेत्र के मामले में किसानों ने सीकर बंद कर मंडी में सभा भी की थी। किसानों की नाराजगी को देखते हुए उस समय यूडीएच मंत्री ने मास्टर प्लान में संशोधन का आश्वासन दिया था।
मास्टर प्लान का प्रारूप रद्द होने के बाद सोशल मीडिया पर पिछले एक सप्ताह से सियासत जारी है। कई संगठनों की ओर से मास्टर प्लान के प्रारूप के रद्द होने के मामले को सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है। कई संगठनों की ओर से प्रारूप रद्द होने से किसानों के फायदे की बात कही जा रही है। कई लोगों की ओर से शहरी विकास ठप करने के आरोप भी सरकार पर लगाए जा रहे है।
1. मास्टर प्लान अटकने से शहर में अनियोजित बसावट लगातार बढ़ रही है। अब नियोजित तरीके से बसावट के लिए मास्टर प्लान जरूरी है।
2. शिक्षानगरी की अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट के साथ दूसरे शहरों के निवेशकों का अहम रोल है। मास्टर प्लान के विवाद की वजह से निवेशक जयपुर या छोटे कस्बों में जाने लग गए है। इससे शिक्षानगरी की अर्थव्यवस्था को सीधा नुकसान हो रहा है।
3. मास्टर प्लान के सियासी झगड़े के बाद ज्यादातर रियल एस्टेट कारोबारियों की ओर से नई कॉलोनी डवलप नहीं की जा रही है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
4. शिक्षानगरी में लगातार स्कूल व कॉलेजों की ओर से अपने कैम्पसों को बाहर भी शिफ्ट किए जाने की तैयारी है। मास्टर प्लान के अटकने की वजह से कई संस्थान अपने नए कैम्पस के लिए जमीन खरीदने का प्लान बदल दिया है। यदि किसी जोन में बड़े शिक्षण संस्थान की ब्रांच खुलती है तो पूरे क्षेत्र में विकास भी होता है।