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Sikar News: रामभक्त रानी बणीरोत की इच्छा पर देवी सिंह ने बसाए रामगढ़ व रघुनाथगढ, बेटे का नाम रखा लक्ष्मण, जिसने बसाया लक्ष्मणगढ़

Ram Navami 2026: राव देवी सिंह ने संवत 1848 यानी सन 1791 में रघुनाथगढ़ तथा रामगढ़ सेठान कस्बा बसाया। रघुनाथगढ़ में भगवान राम के एक जैसे पांच राम मंदिर भी बनवाए।
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Mar 26, 2026
रघुनाथगढ़ और लक्ष्मणगढ़
रघुनाथगढ़ और लक्ष्मणगढ़

Ram Navami 2026: भक्तों को भगवान का मुकुटमणि भी कहा जाता है। सीकर रियासत की एक रानी भी भगवान राम की ऐसी ही माणिक थी, जिनकी आस्था की चमक आज भी जिले के तीन कस्बों व एक मंदिर के नाम से रोशन हो रही है। ये रानी राव देवी सिंह की पत्नी बणीरोत थी, जिनकी रामभक्ति ही जिले में रामगढ़, रघुनाथगढ़ व लक्ष्मणगढ़ कस्बों के नामकरण सहित बावड़ी गेट स्थित रघुनाथजी के मंदिर की प्रेरणा बनी।

रामगढ़ व रघुनाथगढ़ के साथ बनवाए 5-5 मंदिर

इतिहासकार महावीर पुरोहित ने बताया कि संवत 1820 में राजगद्दी संभालने वाले राव देवी सिंह का विवाह चूरू की बणीरोत से हुआ था। वह परम राम भक्त थी। उन्होंने ही भगवान राम के राम पर नए गढ़ की इच्छा राव देवी सिंह के सामने रखी थी।

उनकी इच्छा व रामभक्ति देखते हुए ही राव देवी सिंह ने संवत 1848 यानी सन 1791 में रघुनाथगढ़ तथा रामगढ़ सेठान कस्बा बसाया। रघुनाथगढ़ में भगवान राम के एक जैसे पांच राम मंदिर भी बनवाए। जीर्ण शीर्ण अवस्था में अब भी वे मंदिर रामभक्ति की गवाही देते हैं।

बेटे के नाम से बना लक्ष्मणगढ़

इन्हीं राव देवी सिंह व रानी बणीरोत के संतान हुई तो उन्होंने उसका नाम लक्ष्मण सिंह रखा। आगे चलकर इन्हीं लक्ष्मण सिंह ने लक्ष्मणगढ़ की स्थापना की।

गढ़ में बना रघुनाथजी व जानकी वल्लभ मंदिर

शहर के सुभाष चौक स्थित जानकी वल्लभ तथा रघुनाथ मंदिर भी रानी बणीरोत की ही रामभक्ति के प्रतीक है। उनकी नियमित पूजा- अर्चना के लिए ही देवी सिंह ने इन मंदिरों को बनवाया था।

पुरोहित के अनुसार रघुनाथजी के मंदिर की नींव संवत 1840 में रखी गई। देवगढ़ के किले व कदमा का बास में भी राव देवी सिंह ने रघुनाथजी का मंदिर बनवाया। राम नवमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है। आज 26 मार्च को यह राजस्थान सहित पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।

राम नवमी भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में मनाई जाती है। यह दिन मर्यादा, धर्म और सत्य के प्रतीक भगवान राम के आदर्शों को याद करने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संदेश देता है। इस दिन भक्तजन व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। राजस्थान में इस दिन शहरों, कस्बों और गांवों में शोभायात्राएं निकाली जाती हैं और भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

Updated on:
26 Mar 2026 03:34 pm
Published on:
26 Mar 2026 03:34 pm
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