
सीकर. पुलिस की ओर से आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के सभी दावे खोखले साबित होते जा रहे हैं। क्राइम इन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार स्थिति यह है कि पिछले दो सालों में जयपुर रेंज में आने वाला सीकर जिला दूसरे नंबर पर रहा है। वहीं 1305 आत्महत्या होने पर अलवर जिला सबसे टॉप पर है।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस की जयपुर रेंज में जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के अलावा प्रदेश के चार जिले आते हैं। इनमें सीकर, अलवर, दौसा व झुंझुनूं शामिल है। क्राइम इन इंडिया की रिपोर्ट में 2016-17 में इन पांच जिलों में 4433 लोग आत्महत्या के शिकार हुए हैं। इनमें शेखावाटी के दो जिले सीकर व झुंझुनूं में 1852 जनों ने किसी कारण अपने आप को मौत के हवाले कर दिया था। जबकि जयपुर ग्रामीण व दौसा जिले में 1276 महिला व पुरुषों ने मौत को गले लगा लिया था।
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हालांकि सूत्रों का कहना है कि आत्महत्या करने वालों की संख्या इनसे ज्यादा ही है। क्योंकि यह आंकड़ा तो वह जो कि, पुलिस के पास रिकार्ड हुआ है। जबकि कई ऐसे मामले भी है। जिनमें आत्महत्या के बाद परिजनों ने गुपचुप ही प्रकरण को दबा दिया और संबंधित की मौत होने के बाद बिना रिपोर्ट दिए उसे जला दिया या दफना दिया गया है। बढ़ते ही गए मामले सीकर, अलवर व झुंझुनूं जिले में हर साल आत्महत्या के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। जबकि पिछले दो सालों की तुलना में जयपुर ग्रामीण व दौसा जिले में 2017 के बजाय 2016 में लोगों ने कम आत्महत्या की है।
आत्महत्या करने के लिए लोगों ने कई तरह के तरीके इस्तेमाल किए हैं। जिनमें ट्रेन से कटने, जहर खाने, कूएं में कूदने के अलावा पेड़ व पंखे से लटक कर जान देना शामिल है। इनमें कई तो ऐसे थे, जिन्होंने मरने से पहले आत्महत्या का कारण बताते हुए सुसाइड नोट भी छोड़े थे।
कहां कितनी मौत
वर्ष क्षेत्र मौत
2016 सीकर 478
2017 सीकर 494
2016 अलवर 608
2017 अलवर 695
2016 झुंझुनूं 454
2017 झुंझुनूं 426
2016 जयपुर ग्रामीण 374
2017 जयपुर ग्रामीण 350
2016 दौसा 270
2017 दौसा 282
मामलों का अध्ययन कर रोकने के प्रयार करेंगे
सीकर जिले में हो रही आत्महत्याओं के मामलों का अध्ययन कर ऐसी घटनाओं को रोकने का पुलिस भरपूर प्रयास करेगी। इसके अलावा जागरूकता फैलाकर मौत के आगे घुटने टेकने वालों में हिम्मत पैदा की जाएगी। ताकि वे लोग जिंदा रहेंगे तो उनकी समस्याओं का हल निकलने की संभावना भी रहेगी।
-गौरव यादव, पुलिस अधीक्षक सीकर