
Sikar DAP Fertilizer: सीकर जिले में रबी की बुवाई के बीच डीएपी की मांग बढ़ने के साथ ही खाद की किल्लत और जमाखोरी रोकने के लिए कृषि विभाग ने वितरण व्यवस्था सख्त कर दी है। राजस्थान पत्रिका में खबर के प्रकाशन के बाद कृषि विभाग फौरन हरकत में आया। जिले में डीएपी की 300 मीट्रिक टन खेप पहुंची है। विभाग ने कालाबाजारी और खाद की किल्लत रोकने के लिए डीएपी विभिन्न क्षेत्रों की मुख्य ग्राम सेवा सहकारी समितियों और केवीएसएस तक पहुंचाई है। फिलहाल, एक किसान को जरूरत के अनुसार डीएपी का एक बैग ही देने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे कुछ किसान एक साथ अधिक खाद खरीदकर स्टॉक जमा नहीं कर सकेंगे और सभी किसानों तक खाद पहुंच सकेगी। वहीं, खाद वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पॉश मशीन के माध्यम से ही डीएपी देने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि पर्यवेक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, जो वितरण व्यवस्था पर नजर रखेंगे। जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। श्रीमाधोपुर में भी अलग से कंट्रोल रूम के जरिए खाद की उपलब्धता और वितरण की निगरानी की जाएगी।
सीकर जिले में बठोठ, पटवारी का बास, सीकर, खंडेला, रानोली, मलिकपुर, खाटूश्यामजी, अलोदा और धीरजपुरा सहित विभिन्न ग्राम सेवा सहकारी समितियों तक डीएपी पहुंचाई गई है। विभाग का प्रयास है कि खाद का वितरण क्षेत्रवार हो और किसानों को अपने नजदीकी केंद्रों पर ही खाद उपलब्ध हो सके।
रबी सीजन में यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ने के साथ ही कृषि विभाग ने खाद वितरण व्यवस्था पर निगरानी बढ़ा दी है। किसानों को जरूरत के समय खाद मिले और वितरण में कालाबाजारी, ओवररेटिंग व जबरन टैगिंग जैसी गड़बड़ियां नहीं हों, इसके लिए अब डीलरों के साथ विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भी जवाबदेही तय की गई है।
खाद वितरण में अनियमितता मिलने पर संबंधित विक्रेता के साथ निगरानी में लगे जिम्मेदार कार्मिकों पर भी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने खाद वितरण में गड़बड़ी रोकने के लिए उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बुवाई के समय खाद की मांग एक साथ बढ़ने से वितरण केंद्रों पर दबाव बनता है। ऐसे में एक किसान को जरूरत के अनुसार एक बैग देने की व्यवस्था का उद्देश्य खाद का समान वितरण करना और अनावश्यक भंडारण रोकना है। जिले में डीएपी और यूरिया की मांग भेजी हुई है। संबंधित अधिकारियों ने नियमित रूप से यूरिया व डीएपी की खेप भिजवाने का आश्वासन दिया है।
-शिवजीराम कटारिया, संयुक्त निदेशक, कृषि