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Rajasthan : राजस्थान में सरकारी स्कूलों में नई व्यवस्था, शिक्षकों और कर्मिकों देना होगा गैरहाजिरी का हिसाब

Rajasthan Government Schools : सीकर. राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों पर निगरानी रखने के लिए नई कवायद शुरू की है। इसके तहत प्रदेश में सरकारी स्कूलों में अब छुट्टी होने पर भी उसका पूरा हिसाब डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा।
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सीकर

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Sanjay Kumar Srivastava

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Updated: 3 Nov 2026, 3:34 PM IST

rajasthan government schools new system holiday entry module launched

Sikar : प्रतीकात्मक फोटो हैं, एआइ से बनाई है।

Rajasthan Government Schools : सीकर. सरकार ने सरकारी स्कूलों पर निगरानी रखने के लिए नई कवायद शुरू की है। इसके तहत प्रदेश में सरकारी स्कूलों में अब छुट्टी होने पर भी उसका पूरा हिसाब डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा। स्कूलों में विद्यार्थियों और कार्मिकों की उपस्थिति को लेकर भी निगरानी बढ़ाई है। जिसके तहत स्कूलों में अवकाश की जानकारी और उसके कारणों को लेकर जवाबदेही तय करने के लिए शिक्षा विभाग ने शाला दर्पण पोर्टल पर नया हॉलिडे एंट्री मॉड्यूल शुरू किया है। इसके तहत संस्था प्रधानों को स्कूल में घोषित अवकाश की तारीख के साथ उसका कारण भी पोर्टल पर दर्ज करना होगा। अच्छी बात है कि इससे उच्चाधिकारी किसी भी स्कूल के अवकाश की ऑनलाइन जांच कर सकेंगे और बिना स्पष्ट कारण छुट्टी रखने या नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर नजर रख सकेंगे।

रोजाना दोपहर 1.30 बजे तक विद्यार्थियों और स्टाफ की उपस्थिति का पूरा डेटा शाला दर्पण पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इससे स्कूलों में वास्तविक उपस्थिति और पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों का मिलान करना आसान होगा। साथ ही लगातार अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों और कार्मिकों की स्थिति भी सामने आ सकेगी।

रहेगा पूरा रिकॉर्ड, जवाबदेही होगी तय

एक्सपर्ट के अनुसार राजस्थान में नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्कूलों में घोषित छुट्टियों का रिकॉर्ड एक ही पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा। उच्चाधिकारी बिना स्कूल पहुंचे अवकाश की तारीख और कारण का सत्यापन कर सकेंगे। इससे मनमाने तरीके से छुट्टी घोषित करने, उपस्थिति में गड़बड़ी करने और कागजी रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका कम होगी। विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति का विश्लेषण कर कम नामांकन और लगातार अनुपस्थित रहने वाले बच्चों पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।

संस्था प्रधानों का बढ़ेगा काम

इस कवायद के तहत संस्था प्रधानों और स्कूल स्टाफ पर ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करने का अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या, पोर्टल की तकनीकी दिक्कत या बिजली बाधित होने पर निर्धारित समय तक उपस्थिति अपलोड करना चुनौती बन सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना दोपहर डेढ़ बजे की समय-सीमा के कारण शिक्षकों का समय शिक्षण कार्य के बजाए डेटा एंट्री में भी खर्च हो सकता है। ऐसे में तकनीकी समस्या के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो उपस्थिति के बावजूद पोर्टल पर स्कूलों की स्थिति प्रदर्शित हो सकती है।

जवाबदेही बढ़ेगी

यह व्यवस्था लागू हो गई है। डिजिटल रिकॉर्ड से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने से स्कूलों में शिक्षण की गुणवत्ता या विद्यार्थियों की वास्तविक पढ़ाई में सुधार आएगा।
हरबंस लाल, डीइओ, माध्यमिक जिला मुख्यालय, सीकर