सीकर

RIICO-Bikaner Bypass: सीकर में 450 मीटर जमीन ने रोकी करोड़ों की सड़क, 8 साल से अटकी फाइल

Sikar News: रीको औद्योगिक क्षेत्र से बीकानेर बाईपास को सीधे जोड़ने वाले मार्ग की वन मंत्रालय से अटकी स्वीकृति के मामले में सरकारी सिस्टम के 'ज्ञान की पोल' उधड़कर सामने आई है। सड़क निर्माण 450 मीटर भूमि के चलते पिछले आठ साल से अटका है।

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May 14, 2026
रीको-बीकानेर बाईपास सड़क परियोजना। Photo: AI-generated

सीकर। रीको औद्योगिक क्षेत्र से बीकानेर बाईपास को सीधे जोड़ने वाले मार्ग की वन मंत्रालय से अटकी स्वीकृति के मामले में सरकारी सिस्टम के 'ज्ञान की पोल' उधड़कर सामने आई है। दरअसल, मार्ग में बाधा बन रही वन विभाग की जमीन के संबंध में नगर सुधार न्यास (यूआइटी) द्वारा आक्षेप दूर करने के बाद राज्य सरकार ने स्वीकृति के लिए फाइल केंद्र सरकार के एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय (आइआरओ) को भेजी थी।

जिस पर आइआरओ ने यूआइटी को एक निजी संस्था या एनजीओ मानते हुए सड़क निर्माण में उसकी रुचि पर हास्यास्पद ढंग से सवाल उठाते हुए आपत्ति लगा दी है। ऐसे में विभागीय कार्य प्रणाली अज्ञानता के आरोपों से घिर गई है, वहीं सीकर शहर का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट एक बार फिर अधर में अटक गया है।

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आइआरओ ने पूछा-सरकारी एजेंसी की बजाय ट्रस्ट एजेंसी क्यों

आइआरओ ने आक्षेप में लिखा है कि यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित सड़क के विकास कार्य को पीडब्ल्यूडी और आर एंड बी विभाग की बजाय कोई ट्रस्ट क्यों करवाना चाहता है। आपत्ति में उपयोगकर्ता एजेंसी यानी यूआईटी के पक्षकार बनने के अधिकार व विधिक स्थिति की जानकारी देने को कहा गया है।

मास्टर प्लान की सड़कों पर भी सवाल

आइआरओ के हिसाब से इस मार्ग में यूआइटी की ओर से अब तक बनी सड़क व भवन भी अतिक्रमण के दायरे में माने जा रहे हैं। क्योंकि आइआरओ ने गुगल अर्थ सैटेलाइट चित्रों के अवलोकन के आधार पर मार्ग में मौजूदा सड़कों व अन्य भवनों की स्वकृतियां मांगने के साथ उनकी वर्तमान स्थिति की भी जानकारी चाही है। चूंकि ये सड़क निर्माण मास्टर प्लान के हिसाब से यूआइटी द्वारा करवाए गए हैं। ऐसे में इस बिंदू पर भी सरकारी कार्य प्रणाली पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

450 मीटर भूमि से आठ साल अटकी फाइल

रीको से बीकानेर बाइपास तक सड़क निर्माण वन विभाग की 450 मीटर भूमि के चलते पिछले आठ साल से अटका है। करीब 1.3 किमी लंबे व 30 मीटर चौड़े मार्ग का शिलान्यास 2018 में हुआ था। पर मार्ग के बीच में वन विभाग की इस भूमि का डायवर्जन नहीं होने से निर्माण कार्य अटक गया। तब से ये फाइल यूआइटी से जिला वन विभाग और वहां से राज्य और केंद्र सरकार की टेबिलों पर अटक-अटक कर चल रही है।

कमजोर पैरवी को लेकर सरकार

प्रोजेक्ट फाइल बार-बार अटकने पर राज्य सरकार के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि सरकार व स्थानीय नेता परियोजना की पैरवी सभी तथ्यों व तर्कों के आधार पर मजबूती से करते तो सड़क निर्माण के साथ अब तक शहर को जाम से बड़ी निजात मिल सकती थी। पर किसी भी स्तर पर ठोस कार्य नहीं होने से परियोजना पूर्णता तक नहीं पहुंच पा रही।

तो ये हो फायदा

कृषि मंडी और रीको औद्योगिक क्षेत्र सहित जयपुर रोड आने वाले हजारों वाहनों को अभी बाजार से होकर गुजरना पड़ रहा है। इससे बस डिपो, बजरंग कांटा और राणी सती इलाके में जाम की स्थिति रहती है। रीको से बीकानेर बाईपास सड़क बनने पर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। इस रास्ते का उपयोग करने से किसानों, व्यापारियों व आमजन का काफी समय व ईंधन भी बचेगा।

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