
सीकर.
शहीदों की याद में लगेंगे हर वर्ष मेले, वतन पर मिटने वालों के यहीं निशां होंगे। लेकिन शेखावाटी क्षेत्र इस मिसाल से भी कुछ अलग है। यहां शहीदों की याद में हर वर्ष मेले नहीं हर खुशी के मौके पर शहीद को पहले याद किया जाता है। ऐसा ही कुछ नजारा रविवार को सिहोट छोटी में देखने को मिला तो गांव के हर व्यक्ति का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया।
मौका था करगिल शहीद गणपत सिंह ढाका की बहन का अपने पीहर में बेटी की शादी से पहले भात का न्योता देने पहुंची। शहीद की बहन ने शादी में भात के न्यौते से पहले अपने शहीद भाई की प्रतिमा पर पहुंची। वहां उसने शहीद गणपत सिंह ढाका की प्रतिमा के राखी बांधी तथा भाई को शादी में भात भरने के लिए न्योता दिया।
शहीद भाई के प्रति बहन के प्यार को देखकर ग्रामीणों की आंखों में आंसु थे, लेकिन देश की रखा के लिए शहीद होने वाले बेटे के लिए मन भी गर्वित था। कारगिल शहीद गणपत सिंह ढाका की शहादत के बाद यह पहला भात का कार्यक्रम था। परिवार के सभी लोग त्योहार व विशेष पर्वों पर सबसे पहले शहीद को नमन करते हैं। रक्षाबंधन पर बहनें सबसे पहले शहीद की प्रतिमा पर राखी बांधती हैं।
करगिल में शहीद हुआ था गणपतसिंह
सिहोट छोटी गांव का लाडला गणपत सिंह ढाका करगिल युद्ध के दौरान शहीद हो गया था। शहीद की बहन भंवरी की बेटी प्रियंका की 21 जून को शादी होनी है। शादी से पहले भंवरी अपने पीहर सिहोट छोटी गांव में भाईयों व पिता को मायरा लेकर पहुंचनें के लिए न्योता देने पहुंची थी। इसी दौरान वह सबसे पहले गांव में बने शहीद स्मारक पर छोटे भाई गणपत सिंह ढाका के शहीद स्मारक पर गई। शहीद स्मारक पर ही गणपत सिंह की वीरांगना मंजूदेवी व शहीद भाई गणपत को मायरे के लिए न्योता दिया। इस दौरान शहीद गणपत की प्रतिमा के राखी भी बांधी।
बहन की आंखे हो गई नम
छोटे भाई की प्रतिमा के राखी बांधने के बाद भंवरी की आंखे नम हो गई। वह नम आंखों से कई देर तक भाई की प्रतिमा को निहारती रही। इस दौरान परिवार के सदस्यों ने उसे सात्वंना दी। हालांकि इस दौरान वीरांगना मंजूदेवी व परिवार के अन्य सदस्यों की भी आंखें नम हो गई। बाद में भंवरी ने अपने दूसरे भाई सुरेन्द्र सिंह ढाका, महेश ढाका, भतीजे नरेन्द्र ढाका सहित परिवार के भाई भतीजों को तिलक करके भात का न्योता दिया। इस दौरान परिवार के सभी लोगों के बीच शहीद गणपत की याद फिर से ताजा हो गई। शहीद गणपत सिंह की बहन व परिवार के सभी लोग त्यौहार व विशेष पर्वो पर शहीद को नमन करने प्रतिभा स्थल पर पहुंचते है।