सीकर

समस्याओं में उलझे छात्रसंघ अध्यक्ष

कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों के बाद आचार संहिता के चलते विकास का कोई भी काम नहीं हो पाया।
3 min read
Jan 30, 2019
sikar local news
समस्याओं में उलझे छात्रसंघ अध्यक्ष

सीकर.

कॉलेजों में छात्रसंघ चुनावों के बाद आचार संहिता के चलते विकास का कोई भी काम नहीं हो पाया। कॉलेजों में छात्रसंघ उद्घाटन समारोह भी चार महीने बाद हुए है। अब फिर मार्च महीने में लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लग सकती है। छात्रसंघ चुनाव इस बार भले ही दिलचस्प रहे हो लेकिन विकास की तस्वीर धुधली नजर आ रही है। इस बार कई दिग्गज छात्र नेताओं के किले ढह गए। दोनों ने एक दूसरे के गढ़ों में सेंध लगाकर जीत दर्ज की। लेकिन जिन मांगों को लेकर विद्यार्थियों ने इन प्रत्याशियों पर भरोसा किया। उन मांगों को पूरा करने के लिए प्रत्याशियों के पास इस सत्र में ना तो बजट और ना ही समय है।
विकास के लिए बजट ही नहीं
कॉलेजों में वार्षिकोत्सव व उद्घाटन समारोह के अलावा किसी भी तरह का बजट जारी नहीं हुआ। कॉलेजों में विकास कार्य के नाम पर बनी विकास समितियों की बैठक भी समय पर नहीं हो रही है। अगर किसी महाविद्यालय में हुई भी है, तो इसकी सूचना प्रत्याशियों को नहीं मिल रही है। इस कारण खुद छात्र नेताओं में काफी आक्रोश है।
और ये बोले छात्र नेता,बैठक ही नहीं हुई
कला महाविद्यालय से एबीवीपी छात्रसंघ अध्यक्ष नितिश कुमार ने बताया कि इस सत्र में कॉलेज विकास समिति की एक भी बैठक नहीं हुई। छात्रसंघ उद्घाटन के अलावा एक भी बैठक में छात्रसंघ अध्यक्ष को शामिल नहीं किया गया। कॉलेज विकास एवं छात्रहितों के लिए पुस्तकालय की व्यवस्था, कम्प्यूटर लैब, खेल ग्राउंड, खेल सामग्री, शारीरिक शिक्षक व शिक्षकों की कमी को दूर करने, कॉलेज की चार दीवारी, कॉलेज परिसर में बिजली लाइन को हटाने, शौचालय का निर्माण एवं सफाई व्यवस्थाओं की मांग अधूरी है।
खर्चा भी नहीं बताया जाता
कन्या महाविद्यालय से एबीवीपी के छात्रसंघ अध्यक्ष संजू मूंड का कहना है कि विकास समिति की एक भी बैठक उनकी उपस्थिति में नहीं हुई। छात्रसंघ उद्घाटन व वार्षिकोत्सव में लगे खर्च का विवरण भी अध्यक्ष के सामने नहीं रखा गया। दोनों समारोह में जारी हुए बजट का भी कोई लेखा-जोखा नहीं है। महाविद्यालय में साइंस लैब में उपकरण नहीं है, पानी की टंकियों में गंदे पानी से परेशानी, भूगोल विषय नहीं होने के चलते छात्राओं को कटराथल कला महाविद्यालय में प्रवेश लेना पड़ता है। कॉलेज में एनसीसी और कैंटीन नहीं है। कॉमर्स में जीएसटी विषय नहीं है।
कम्प्यूटर लैब की व्यवस्था हो
वाणिज्य महाविद्यालय से एसएफआई के अध्यक्ष प्रयास मिश्रा का कहना है कि इस सत्र में महाविद्यायल विकास समिति की दो बैठकें हुई। दोनों में हमारी उपस्थित रही। पहली बैठक में विधानसभा चुनाव में ड्यूटी के चलते कुछ समय के लिए दो प्रोफेसरों को लगाने व ट्यूबवैल सेंक्शन को लेकर चर्चा हुई। उस समय प्रोफेसरों की नियुक्ति हो गई। दूसरी बैठक छात्रसंघ उद्घाटन समारोह को लेकर हुई। समारोह के लिए ४० हजार रुपए का बजट भी जारी हुआ। लेकिन अब कॉलेज को सांवली रोड़ पर जल्द स्थानांरण करने व प्रोफेसरों की संख्या बढ़ाने एवं कम्प्यूटर लैब की उचित व्यवस्था करने की मूल मांगें है।
पांच बैठक हो चुकी है
विज्ञान महाविद्यालय से एसएफआई के अध्यक्ष राहुल बाना ने बताया कि छात्रसंघ उद्घाटन समारोह के लिए एक लाख १४ हजार ७०० रुपए का बजट जारी हुआ है। इसके अलावा कॉलेज में भामाशाहों के सहयोग से कॉलेज में लाखों रुपए का कार्य हुए है। इस सत्र में विकास समिति की पांच मीटिंग हो चुकी है।
समस्याओं से घिरा है कॉलेज
संस्कृत महाविद्यालय से एबीवीपी के छात्रसंघ अध्यक्ष तेजप्रकाश शर्मा ने कहा इस सत्र में कॉलेज विकास समिति की बैठक के लिए अध्यक्ष को एक भी बार सूचित नहीं किया गया। महाविद्यालय में मूल प्राचार्य का पद पिछले तीन साल से रिक्त चल रहा है। विश्वविद्यालय के बाद प्रदेश का यह सबसे बड़ा महाविद्यालय है। लेकिन विड़बना यह है कि इस परिसर में महाविद्यालय व स्कूल दोनों चलते है। इसके चलते कॉलेज का कोई भी काम १२ बजे पहले संपन्न करना पड़ता है। इसके अलावा महाविद्यालय के बाहर लंबे समय से अतिक्रमण चल रहा है। महाविद्यालय में पुस्तकालय अध्यक्ष भी नहीं है।
उद्घाटन की कोई सूचना नहीं
विधि महाविद्यालय से एनएसयूआई के अध्यक्ष सचिन जाखड़ का कहना है कि कॉलेज में छात्रसंघ उद्घाटन को लेकर भी अभी तक कोई सूचना नहीं है। इस सत्र में किसी भी प्रकार का कोई बजट जारी नहीं हुआ। विकास समिति की एक बैठक हुई। जिसमें महाविद्यालय परिसर में मिट्टी भराव, प्रोफेसरों के लिए लॉकर की व्यवस्था व हॉल में स्पीकर लगाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कॉलेज में स्टेज, पेड़-पौधे लगाने, मुख्य द्वार व साइकिल स्टेंड बनाने की मांगे है।

Updated on:
30 Jan 2019 05:26 pm
Published on:
30 Jan 2019 05:26 pm