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राजस्थान में 60 हजार शिक्षकों पर मंडराया नौकरी का संकट! 34 साल बाद भी पास करनी होगी टेट

सरकारी स्कूलों में सेवारत शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टेट) पास करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर राजस्थान के करीब 60 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों पर पड़ेगा। उन्हें अब 31 अगस्त 2028 तक ये परीक्षा अनिवार्य रूप से पास करनी होगी।
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Updated: 5 Jun 2026, 6:02 PM IST
Rajasthan Teacher Transfer
Rajasthan Sanskrit Teacher Transfer: (फाइल फोटो-पत्रिका)

सीकर। सरकारी स्कूलों में सेवारत शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टेट) पास करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर प्रदेश के करीब 60 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों पर पड़ेगा। उन्हें अब 31 अगस्त 2028 तक ये परीक्षा अनिवार्य रूप से पास करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर उन्हें सरकारी सेवा से बाहर कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि ये वे शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति 2010 में टेट लागू होने से पहले हुई थी।

दरअसल, उस समय टेट परीक्षा का प्रावधान ही नहीं होने से वे बिना टेट परीक्षा ही राजकीय सेवा में नियुक्त हुए थे। पर सुप्रीम कोर्ट ने अब तीन साल में सेवारत शिक्षकों के लिए भी टेट पास करना अनिवार्य कर दिया है तो पुराने सभी शिक्षकों के सामने सेवा में बने रहने का बड़ा संकट गहरा गया है। खास बात ये है कि गणना के हिसाब से कई शिक्षक तो करीब 32 से 34 वर्ष की सेवा के बाद भी ये परीक्षा देने को मजबूर हो सकते हैं। गौरतलब है कि देश में 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद 23 अगस्त 2010 को देशभर में टेट अनिवार्य की गई थी।

अब एक साल और बढ़ी मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने टेट के मामले में पिछले साल सितंबर महीने में फैसला सुनाते हुए सभी शिक्षकों के लिए टेट पास करना अनिवार्य किया था। सेवारत शिक्षकों की सेवा जारी रखने और पदोन्नति के लिए दो साल में टेट पास करने की मोहलत दी थी। शिक्षकों ने इस पर पुर्नविचार याचिका दायर की तो सुप्रीम कोर्ट ने अब फिर टेट की अनिवार्यतता लागू रहने की बात कहते हुए सेवारत शिक्षकों की मोहलत एक साल और बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2028 कर दी है।

परीक्षा पास होना चुनौती

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 31 अगस्त 2028 तक टेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य किए जाने के बाद कुछ शिक्षकों को 34 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी पात्रता परीक्षा देनी पड़ सकती है। यदि किसी शिक्षक की नियुक्ति 21 वर्ष की आयु में हुई थी और वर्ष 2028 में उसकी आयु 55 वर्ष से कम रहती है, तो उसे टेट से छूट नहीं मिलेगी। इस आधार पर ऐसे शिक्षक की नियुक्ति वर्ष 1994 के आसपास हुई होगी। यानी तीन दशक से अधिक समय तक अध्यापन करने वाले शिक्षकों को भी सेवा में बने रहने के लिए टेट पास करनी पड़ सकती है। ऐसे में इतने वर्षों बाद पढ़ाई कर प्रतियोगिता के मौजूदा कठिन दौर में ये परीक्षा उत्तीर्ण करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है।

पांच साल से कम सेवा पर छूट

सेवारत शिक्षकों में टेट उन्हीं शिक्षकों को पास करनी होगी, जिनकी सेवा में पांच साल से ज्यादा का समय बचा है। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर महीने में दिए फैसले में ही साफ कर दिया था कि सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय वाले शिक्षकों को टेट से छूट होगी।

इतने होंगे प्रभावित

प्रदेश के प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन स्कूलों में वर्तमान में करीब 2.40 लाख ग्रेड थर्ड शिक्षक कार्यरत हैं। वर्ष 2012 से 2023 के बीच रीट पात्रता के आधार पर हुई विभिन्न शिक्षक भर्तियों में लगभग 1.91 लाख शिक्षकों की नियुक्ति हुई। इनमें से पदोन्नति व अन्य सेवाओं में जाने के बाद बचे करीब 1.45 लाख शिक्षक टेट पात्रता व्यवस्था के तहत सुरक्षित माने जा रहे हैं। वहीं, विभाग में लगभग 35 हजार पद अभी भी रिक्त हैं। ऐसे में वर्ष 2012 से पहले नियुक्त हुए करीब 60 हजार शिक्षकों के सामने टेट पात्रता को लेकर अनिश्चितता और संकट की स्थिति पैदा हो गई है।

शिक्षक संगठनों ने की हस्तक्षेप की मांग

राष्ट्रीय शिक्षक संघ वा अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ सरीखे संगठनों ने केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर उचित विधायी समाधान की मांग की है। संघ प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र शर्मा और महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता व महासचिव प्रो. गीता भट्ट के अनुसार प्रभावित शिक्षकों की नियुक्तियां तत्कालीन नियमों, अधिसूचनाओं और सक्षम प्राधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया से की थी। इस संबंध में सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए।

Updated on:
5 Jun 2026, 6:02 PM IST
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