सीकर. सोने और चांदी के दामों में आई तेजी ने प्रदेश में आयुर्वेद का उपचार लेने वाले हजारों मरीजों पर इसका असर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी स्किन रोग, बर्न के मरीजों और बुजुर्गों को हो रही है, जो लंबे समय से नियमित रूप से आयुर्वेद में उपयोग होने वाली स्वर्ण भस्म और रजत भस्म के मिश्रण से बनी दवाएं ले रहे हैं।
सीकर. सोने और चांदी के दामों में आई तेजी ने प्रदेश में आयुर्वेद का उपचार लेने वाले हजारों मरीजों पर इसका असर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी स्किन रोग, बर्न के मरीजों और बुजुर्गों को हो रही है, जो लंबे समय से नियमित रूप से आयुर्वेद में उपयोग होने वाली स्वर्ण भस्म और रजत भस्म के मिश्रण से बनी दवाएं ले रहे हैं। हाल यह है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में उपयोग होने वाली भस्म और विशेष औषधियां महंगी होने से इलाज का खर्च कई गुना बढ़ गया है। स्थिति यह है कि पहले जो दवाएं महज कुछ सौ रुपए में मिल जाती थीं, अब उनके दाम कई गुना बढ़ गए हैं। महंगाई के चलते कई मरीज दवा की मात्रा घटाने या इलाज बीच में छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जब तक सोने-चांदी के भाव ऊंचे बने रहेंगे, तब तक आयुर्वेदिक दवाओं के सस्ते होने की उम्मीद कम है।
आयुर्वेद में उपयोग होने वाली इन दवाओं के निर्माण में प्रयुक्त धातुएं महंगी होने से उत्पादन लागत बढ़ी है। कई कंपनियों ने कीमतें बढ़ा दी हैं, जबकि कुछ ने उत्पादन भी सीमित कर दिया है। एक माह में सोना-चांदी आधारित आयुर्वेदिक दवाओं की कीमतों में 40 से 90 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा बर्न के मरीज के उपचार के काम आने वाली अधिकांश दवाओं और मल्हम में चांदी के घटक होते हैं जिससे इससे चांदी-आधारित दवाओं की उत्पादन लागत बढ़ रही है, हालांकि राहत की बात है कि सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली दवाओं का नया बैच आने के बाद ही दवा की गुणवत्ता का पता चल सकेगा। चिकित्सकों के अनुसार सरकार की ओर से रियायत मिलने पर आयुर्वेद की जरूरी दवाएं बनाने वाली देनी चाहिए जिससे मरीजों को राहत मिल सके।
दवा पहले अब-- बढ़ोतरी प्रतिशत
स्वर्ण भस्म (1 ग्राम)- 15,000 -28,000 से 30,000 -80 से 90
रजत भस्म (10 ग्राम) -900- 1,500- 60
स्किन रोग की औषधि -400- 650 से 700 60
बर्न मलहम- 250 -450 -80
एक माह में बढ़े हुए भावों से आयुर्वेद की दवाएं महंगी स्किन और बर्न और बुजुर्ग मरीजों की बढ़ी मुसीबत
केस एक: वार्ड 34 निवासी 62 साल के रामनारायण शर्मा दो साल से जोड़ों के दर्द और त्वचा की बीमारी दूर करने के लिए आयुर्वेदिक दवा ले रहे हैं लेकिन एक माह पहले तो जो दवा 900 रुपए में मिल जाती थी, अब वही 1600 से 1800 रुपए में मिल रही है। दवाओं के दामों में कमी का इंतजार कर रहें है, इसलिए अब दवा कम मात्रा में लेनी पड़ रही है।
केस दो- बेरी निवासी सुनीता देवी के हाथ और पेट पर खाद्य तेल से जलने के कारण घाव हो गए थे। जलने के घाव के लिए चिकित्सक ने आयुर्वेदिक मलहम और चांदी की भस्म बताई है। दवा के दाम बढ़ने पर अब इन दवा पर 2500 रुपए तक खर्च हो रहा है, जबकि पहले यही इलाज 1200 रुपए में हो जाता था। लेकिन अब महंगाई के कारण इलाज बीच में छोड़ने का डर सता रहा है।
सोने चांदी की कीमतों का आयुर्वेद की भस्म मिश्रण वाली दवाओं पर असर पड़ना तय है। जिससे आयुर्वेद का उपचार प्रभावित हो रहा है। कई कंपनियां ने सोने-चांदी की भस्म वाली दवाओं के उत्पादन में कमी कर दी है। दवाओं की नई खेप के साथ स्वर्ण व चांदी की भस्म वाली दवाओं की कीमतों में तेजी आएगी।
डॉ. प्रदीप पांडे, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी, आयुर्वेद अस्पताल
बर्न के मरीजों के उपचार में संक्रमण रोकने के लिए चांदी के मिश्रण युक्त दवाओं का उपयोग अधिक होता है, बाजार में कई दवाओं की कीमतों में तेजी आई है।
डॉ. पीआर खीचड़, प्लास्टिक सर्जन, कल्याण अस्पताल