सीकर

गांवों की बजाए अब शहरों में बढ़ रहा क्षय रोग

सीकर. पहले जहां क्षय रोग (टीबी) को ग्रामीण बीमारी माना जाता था, अब तेजी से बदलते शहरी जीवन, भीड़भाड़ और प्रदूषण के कारण शहरों में इसके मरीज बढ़ रहे हैं। क्षय रोग विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के कारण इस साल जनवरी व फरवरी माह के दौरान टीबी के सर्वाधिक रोगी सीकर शहर में मिले हैं। दूसरे पायदान पर नीमकाथाना क्षेत्र हैं।
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Mar 24, 2026
TB patients in Rajasthan
प्रतीकात्मक तस्वीर

सीकर. पहले जहां क्षय रोग (टीबी) को ग्रामीण बीमारी माना जाता था, अब तेजी से बदलते शहरी जीवन, भीड़भाड़ और प्रदूषण के कारण शहरों में इसके मरीज बढ़ रहे हैं। क्षय रोग विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के कारण इस साल जनवरी व फरवरी माह के दौरान टीबी के सर्वाधिक रोगी सीकर शहर में मिले हैं। दूसरे पायदान पर नीमकाथाना क्षेत्र हैं। चिंताजनक बात है कि पिछले साल सीकर तहसील क्षेत्र में मरीजों की रिकवरी और ट्रीटमेंट पूरा करने वाले मरीजों का प्रतिशत भी अन्य ब्लॉक की तुलना में कम रहा है। टीबी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए क्षय रोग विभाग की ओर से सौ दिन की कार्ययोजना बनाई गई है यह कार्ययोजना ब्लॉकवार स्क्रीनिंग करने के साथ क्षय रोग की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग करेगी। टीम की ओर से शिविर लगाकर हैंड हेल्ड मशीन से मरीज चिन्हित किए जाएंगे। ब्लड प्रेशर, मधुमेह और एचआईवी सहित असाध्य बीमारियों के मरीजों में इस रोग का खतरा ज्यादा है। जिले में पिछले साल दिसम्बर माह तक साढ़े चार हजार से ज्यादा टीबी के मरीज निक्षय पोर्टल पर दर्ज थे।

फेफड़ों में सर्वाधिक संक्रमण

चिकित्सकों के अनुसार माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस जीवाणु के कारण टीबी रोग होता है। टीबी से पीड़ित मरीज जब छींकता है, खांसता है, हंसता है या थूकता है, तो वे हवा में टीबी के कीटाणु फैलाते हैं। पल्मोनरी टीबी अत्यधिक संक्रामक है, हालांकि, टीबी शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है।

टीका ही बचाव का उपाय

चिकित्सकों के अनुसार बच्चों को जन्म के एक महीने के अंदर बीसीजी का टीका लगवाना चाहिए। यह टीका संक्रमण के अधिक जोखिम वाले लोगों के लिए जरूरी है। टीबी के शुरूआती लक्षण तीन सप्ताह से ज्यादा बुखार, खांसी, खांसी में खून आना, सीने में दर्द, या सांस लेने या खांसने के साथ दर्द, अचानक वजन कम होना, भूख में कमी आना, सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण नजर आते हैं।

टॉपिक एक्सपर्ट

टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है। जरूरत है जागरूकता, समय पर जांच और दवा का पूरा कोर्स लेने की। अगर शहरों में बढ़ते मामलों को नहीं रोका गया, तो यह आने वाले समय में बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकता है। इसको लेकर जागरुकता की जरूरत है।

डॉ. शिबा, सहायक प्रोफेसर, सामुदायिक चिकित्सा

इनका कहना है

सीकर में फिलहाल साढ़े आठ सौ टीबी के मरीज है। यह बीमारी अब गरीब या ग्रामीण बीमारी नहीं रही है। मौजूदा शहरी जीवनशैली और प्रदूषण इसे बढ़ा रहे हैं। इस साल दो माह के दौरान सीकर शहर में एक सौ सत्तर रोगी मिल चुके हैं। विभाग की ओर से जिले में 12 टीबी यूनिट बनाई हुई है। जिनमें सौ दिन तक जागरुकता कार्यक्रम होंगे।

डॉ. रतनलाल जाट, जिला क्षय रोग अधिकारी

Updated on:
24 Mar 2026 11:04 am
Published on:
24 Mar 2026 11:04 am