सिंगरौली

सिंगरौली रीजन के प्रदूषण की मार झेल रहे गांवों में लगेेंगे आरओ सिस्टम

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी नई दिल्ली का आदेश, कोर कमेटी हर तीन माह पर अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगी

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Dec 21, 2017
RO water System for Singrauli polluted Village

सिंगरौली. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी नई दिल्ली मुख्य बैच ने 6 दिसंबर 2017 के आदेश के अनुसार, सिंगरौली रीजन के प्रदूषित गांवों में शुद्ध पेयजल के लिए आरओ सिस्टम लगाए जाने हैं। यह बात गुरुवार को याचिकाकर्ता एवं सुको अधिवक्ता अश्वनी दुबे ने पत्रकारों से कही। उन्होंने बताया कि आदेश के मुताबिक, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य,सचिव एवं जिला कलेक्टर और उद्योगों के प्रमुख सिंगरौली रीजन के कोल माइनिंग एरिया व प्रदूषण की मार झेल रहे गांवो में शुद्ध पेयजल के लिए आरओ सिस्टम लगवायेंगे। साथ ही गांव के जनसंख्या के अनुसार एक या दो आरओ सिस्टम लगवाये जायेंगे। उन्होंने आगे कहा कि आरो सिस्टम लगाने का खर्च संबंधित उद्योगों को देने होंगे। ट्रिब्यूनल का मानना है कि समस्त उद्योग प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। आरो सिस्टम लगवाने की जिम्मेदारी जिला पंचायत अध्यक्ष व नगर निगम की महापौर को सौंपी गई है। क्योंकि ये दोनों पदाधिकारी एनजीटी के आदेश अनुपालन समिति के सदस्य मनोनित किये गए है।

एनजीटी के आदेश पर एक नजर
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्वनी कुमार दुबे बनाम भारत सरकार व अन्य के मामले में जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एनजीटी की मुख्य बैच ने सिंगरौली परिक्षेत्र में स्थापित समस्त उद्योगों जिसमें बिजली परियोजनाएं, कोल माइंन्स, बारूद फैक्ट्रियां,गैस उद्योग, एल्यूमिनियम प्लांट, केमिकल प्लांट, सीमेंट फैक्ट्रिया समेत स्टोन क्रेशर व मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश सरकारों को आदेशित करते हुए कहा है कि एनजीटी की ओर से गठित कोर कमेटी के 14 फरवरी 2014, 7 जुलाई 2014 और 20 अगस्त 2015 के आदेशों का पूरी तरह से पालन किया जाय और किसी भी आदेश की अवहेलना बर्दाश्त नही की जायेगी। न्यायालय ने यह भी कहा है कि 20 अगस्त 2015 के कोर कमेटी के आदेश पर सडक़ मार्ग से कोल परिवहन पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। एनजीटी के पर्यावरण सचिव एवं जिला कलेक्टर को निर्देशित किया है कि सडक़ मार्ग से कोल परिवहन की परमिशन न दे।

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गठित की अनुपालन समिति
एनजीटी ने दोनों राज्यों उत्तरप्रदेश एवं मध्यप्रदेश के लिए अलग-अलग कमेटी का गठन करते हुए पर्यावरण सचिव, जिला पंचायत अध्यक्ष, महापौर का नामी सदस्य कोल माइन्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारयिों को अनुपालन समिति के सदस्य बनाने का आदेश दिया है। अनुपालन समिति को बैठक आयोजन कलेक्टर करेगा।
यह समिति एनजीटी के आदेशों का पालन सुनिश्चित करेंगे। और परिक्षेत्र के पर्यावरण जीव-जन्तु और मानव जीवन पर दुष्प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठायेंगे। अनुपालन समिति हर माह अपनी रिपोर्ट एनजीटी की कोर कमेटी को देंगी और कोर कमेटी हर तीन माह पर अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपेगी।

कोर कमेटी की रिपोर्ट को एनजीटी करेंगी सुनवाई
दुबे ने बताया कि मुख्य बैच में आगे यह भी कहा गया है कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को अभी हम बंद करने का आदेश नही कर रहे हैं। लेकिन अनुपालन समिति की टीम को आदेशित करते हैं कि इस संबंध में अपनी रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल करें तभी बंद करने का आदेश जारी किया जा सकता है। दोनों राज्यों के प्रदूषण एवं नियंत्रण बोर्ड को आदेशित किया गया है कि ऑनलाइन एवर मॉनिटरिंग सिस्टम और हर नदी जल स्त्रोत के पास वाटर क्वालिटी, मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करें। हर उद्योग को आदेशित किया जाता है कि इटीपी व एसटीपी स्थापित करें। सबसे बड़ी बात यह कि कोर कमेटी की रिपोर्ट को एनजीटी में अलग से सुनवाई होगी।

IMAGE CREDIT: patrika

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Published on:
21 Dec 2017 08:42 pm
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