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सिंगरौली। सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार के चाहे कितने भी प्रयास कर लिए जाएं, लेकिन जब तक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझेंगे तब तक सुधार हो पाना मुश्किल है। पिछले कुछ दिनों के दौरान शिक्षा विभाग में एक के बाद ऐसे मामले सामने आए जो विभाग की साख पर बट्टा लगा रहे हैं।
गलती होना स्वाभाविक है लेकिन जानबूझकर लापरवाही की जाए तो उसे उचित नहीं माना जा सकता। एक मामला थमा नहीं कि दूसरा मामला सामने आ गया। उससे भी गंभीर बात यह है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उस लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश की। इससे यह प्रदर्शित होता है कि अधिकारियों की विभाग पर कमान कमजोर है।
स्थाई डीईओ की पदस्थापना पिछले दो वर्षों से नहीं
वे व्यवस्था को सही तरीके से चला नहीं पा रहे हैं। जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। जिन मामलों में लापरवाही की गई है उसे आप जानेंगे तो आश्चर्य होगा। ये ऐसे मामले हैं जो पूरी व्यवस्था की पोल खोल कर रख देंगे। शिक्षा विभाग में स्थाई डीईओ की पदस्थापना पिछले दो वर्षों से नहीं हो पाई है।
गोपनीयता ताक पर
परीक्षा नाम ही काफी है। संवेदनशील एवं गोपनीय, लेकिन चाचर हॉयर सेकेण्डरी स्कूल के जिम्मेदारों ने इसे हल्के में लिया। प्राचार्य एवं अन्य कर्मचारी परीक्षा को लेकर ऐसी लापरवाही करेंगे किसी को भरोसा नहीं था। लेकिन इन्होंने हद दर्जे की लापरवाही की। अर्द्धवार्षिक परीक्षा में इन्होंने न तो समय सारिणी का ख्याल रखा और नहीं प्रश्न पत्र का। शिक्षा विभाग से जारी प्रश्न पत्र को नजरअंदाज कर बाजार से प्रश्न पत्र खरीदे और उसी से परीक्षा करा दी। परीक्षा की समय सारिणी भी खुद ही तैयार की।
छात्रवृत्ति को तरसे छात्र
सरकार अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के बच्चों को छात्रवृत्ति देती है। छात्रवृत्ति की समीक्षा लगभग हर महीने जिले के बड़े अधिकारी भी करते हैं। जिला मुख्यालय बैढऩ के बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में ऐसी लापरवाही हुई कि सत्र 2016-17 के 33 छात्रों की छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई। इस मामले में किसी भी जिम्मेदार पर कार्रवाई भी नहीं हुर्ई। मामले पर पर्दा डालने की कोशिश हुई। सीएम हेल्प लाइन में बच्चों ने शिकायत की तब मामला सामने आया। अब हालत यह हो गई है कि उन बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाएगी।
परीक्षा के दौरान किताब लेकर बैठे छात्र
यह मामला भी परीक्षा से ही संबंधित है। बरका हायर सेकेण्डरी स्कूल में अर्द्धवार्षिक परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल कराई गई। प्राचार्य स्कूल में उपस्थित नहीं थे। परीक्षा दे रहे सभी छात्र किताब से देखकर प्रश्न के उत्तर लिख रहे थे। मामले का खुलासा तब हुआ जब राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन की टीम स्कूल पहुंची तो देखा सभी बच्चे किताब से देखकर उत्तर पुस्तिका लिख रहे हैं। ऐसे में जिले में शिक्षा का स्तर कैसे सुधारा जा सकता है। कलेक्टर स्कूल का निरीक्षण तो करते हैं लेकिन इसके बावजूद भी व्यवस्था में सुधार न आना सवाल खड़ा करता है।
तीनों मामलों में कार्रवाई चल रही है। कार्रवाई के लिए प्रस्ताव तैयार कर जिला पंचायत कार्यालय भेजा गया है। जल्द कार्रवाई होगी।
रोहिणी पाण्डेय, जिला शिक्षा अधिकारी
इस प्रकार के मामले सामने आए हैं। छात्रवृत्ति का भी मामला आया है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
प्रियंक मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ
Published on:
21 Dec 2017 01:12 pm
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