MP News: सिंगरौली में कोल माइंस के नाम पर पेड़ों की कटाई और आदिवासियों के जबरन विस्थापन का मामला अब दिल्ली पहुंच गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रभावितों की पीड़ा सुनी और संसद में लड़ाई का भरोसा दिलाया।
Rahul Gandhi: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में कोल माइंस के लिए अडानी ग्रुप (Adani Group Coal Mines) की दी गई जमीन से बड़ी संख्या में पेड़ काटने और आदिवासियों को विस्थापित करने का मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तक पहुंच गया है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने नई दिल्ली स्थित अपने निवास पर अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ सिंगरौली के प्रभावित आदिवासियों की पीड़ा सुनी। (MP News)
उन्होंने आदिवासियों के प्रतिनिधिमंडल से कहा- आप घबराइए मत, मैं यह मामला संसद में उठाऊंगा। उन्होंने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि उनके अधिकारों की लड़ाई कांग्रेस पूरी ताकत से लड़ेगी और जल्द ही वे स्वयं सिंगरौली आकर स्थिति का जायजा लेंगे।
कांग्रेस नेता अशोक सिंह पैगाम ने बताया कि हमारे साथ बांसी बैरदहा के करीब दस लोगों ने राहुल गांधी से मुलाकात की है। सिंगरौली की समस्याएं उन्हें विस्तार से बताई गई हैं और उन्हें सिंगरौली आने के लिए आमंत्रित किया गया है। इस दौरान झाबुआ के विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया भी मौजूद थे।
प्रतिनिधि मंडल जैसे ही हॉल में प्रवेश करता है तो एक आदिवासी महिला की गोद में छोटे से बच्चे को देखकर राहुल गांधी उसे अपनी गोद में ले लेते हैं। उसे दुलार करते हैं और टॉफी भी देते हैं। प्रतिनिधि मंडल से बातचीत के अंश प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) अपनी डायरी में लिखती रहीं।
आदिवासीः भैया हम लोग सिंगरौली से हैं। दो ढाई साल से हम लोग लगातार लड़ रहे हैं। हम आदिवासी हैं। अपनी जमीन छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहते हैं। हमारी पीढ़ी चली जाएगी तो हम कहां जाएंगे। शासन से हमें कुछ भी सुविधाएं नहीं चाहिए। बस इतना चाहते हैं कि हम जहां हैं, हमें वहीं रहने दिया जाए। लेकिन वहां जबरदस्ती लगभग दो हजार पुलिस फोर्स लगाकर हमेंहटाया जा रहा है।
राहुलः क्या यह पूरी आदिवासी बेल्ट में हो रहा?
पुरुषः महाराष्ट्र गुजरात में भी हो रहा है। गुजरात में बांध बन रहे हैं। लेकिन यह सबसे अलग मैटर है। सिंगरौली को एनर्जी कैपिटल ऑफ इंडिया बोला जाता है। सबसे ज्यादा पावर प्लांट हैं और ओपन कास्ट कोल माइंस हैं। धीरे-धीरे इनके लिए अब वहां कोई जगह नहीं बच रही है। लोगों को डरा धमकाकर जबरदस्ती साइन करवाया जा रहा है। अगर वहां अडानी जी माइंस ले रहे हैं तो दो हजार पुलिस वालों की जरूरत क्या है?
राहुलः ये बत्ताइए, मैं आपकी मदद कैसे करूं?
महिलाः वहां जाकर देखिए कि वहां का पब्लिक को क्या समस्या है। देखिए ये चार महीने का बच्चा है। मैं किसके लिए लड़ाई लड़ रही हूं। अपने बच्चे के लिए। हम लोग तड़प रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे कहां जाएंगे? हम लोग पैसे के लिए नहीं मर रहे हैं, हम लोग जहां रह रहे हैं, हमें वहीं रहने दें। तेंदू अचार इनमें ही हमारी जिंदगी गुजर रही है, यह सब कटवा दिए, हम जाएंगे कहां? हम इतना सफर करके यहां तक आए हैं लेकिन हमारे गांव जैसी स्वस्थ हवा हम लोग कहीं नहीं पाए हैं। पेड़ कट जाएंगे तो क्या वहां स्वस्थ हवा मिल सकती है?
राहुलः में पार्लियामेंट में इस मुद्दे को उठा सकता हूं।
महिलाः दूसरी बात यह है कि जिसे छोटी सी झाड़ी कहकर काटा गया जबकि वे सौ बरस से ज्यादा उम्र के पेड़ हैं।
पुरुषः पेड़ काटने से हमें बेहद दर्द हुआ। हम लोगों के आंखों से आंसू बह रहे हैं।
राहुलः जब वो पेड़ काटते हैं तो आपको क्या लगता है? अंदर कैसा लगता है?
महिलाः हम लोगों को लगता है कि पेड़ नहीं हमको काट रहे हैं क्योंकि छोटे से बड़े हम उन पेड़ों के नीचे ही हुए हैं।
पुरुषः हम लोग उन पेड़ों की पूजा करते हैं। पेड़ हमारे आस्था केंद्र हैं। महुआ तेंदूपत्ता के पेड़ हैं। तेंदूपत्ता से बीड़ी बनाते हैं और बेचते हैं। उससे हमारे बच्चों का शादी विवाह जैसे संस्कार करते हैं। हम लोग उन्हें देवता मानते हैं।
राहुलः पांच तत्वों को?
पुरुषः हम पेड़ काटना नहीं देखना चाहते। यह ती अड़ानी जी ने उड़िसा से लगभग दो हजार लेबर ले जाए। गांव वाले पेड़ काटने को तैयार नहीं थे, तो बाहर से लेबर और मशीनें ले आए।
राहुलः जो लेबर आए, वे भी आदिवासी हैं?
पुरुषः नहीं, गैर आदिवासी थे। पुरे पुलिस लगाकर हमको चारों तरफ से जो भी अपनी बाल रखना चाहता था. उसे 151 के तहत प्रकरण बनाकर जेल भेज दिया। इस तरह से कई लोगों पर फर्जी मुकदमें, जिला बदर की कार्रवाई और जेल भेजने की कार्रवाई कर दी। गांव के सभी लोगों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
एक अन्य पुरुषः आज के समय में इनसे कोई अनुमति नहीं ली गई। जंगल भी खत्म कर दिए। लगभग 3 लाख पेड़ काट दिए हैं। अब आगे भी 10-15 लाख पेड़ और कटेंगे। अभी सबसे बड़ी खदान अड़ानी को आवंटित हुई है, 27 वर्ग किलोमीटर की खदान है, यानी 2200 हैक्टेयर का एरिया दे दिया पूरा। उसमें से 1400 हेक्टेयर वनक्षेत्र है। हमारे एक बैगा आदिवासी भाई को पेड़ कटने से इतना सदमा लगा कि यह मर गया।
महिलाः एक दूसरी बात यह है कि मुआवजे में सौतेला व्यवहार कर रहा है। किसी को चार लाख तो किसी को 16 लाख। इसमें कहां जाएंगे, बनिया की दुकान में तो मिल नहीं रही जमीन कि हम खरीद लेंगे।
राहुलः चार लाख रुपए देने से जो आपको चोट लगी है. वह तो नहीं जाएगी। जैसे आपके भाई को मार दिया, या आपके पिता को मार दिया तो चार लाख से क्या हो रहा है? मतलब आपको तो जंगल चाहिए। मैं करता हूं, ठीक है। अच्छा लगा आपसे मिलकर घबराइए मत। (MP News)